जेल में बंद तेजस्वी के बापू एनडीए के लिये हानिकारक या फायदेमंद ? पढ़िए पूरी रिपोर्ट

जेल में बंद तेजस्वी के बापू एनडीए के लिये हानिकारक या फायदेमंद ? पढ़िए पूरी रिपोर्ट

PATNA : चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे लालू प्रसाद की राजनीतिक हनक अब भी कायम है। लालू बिहार की राजनीति में अपनी क्या हैसियत रखते है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जेल के अंदर होने के बाद भी बिहार की राजनीति के प्रभावित होने का डर उनके विपक्षी को बना हुआ है। 

लालू के जेल में रहने से आरजेडी की अगुवाई वाले गठबंधन को सहानुभूति का फायदा और एनडीए को नुकसान हो रहा है? लालू के जेल में रहने के सियासी असर का आकलन शुरू हो गया है।

एनडीए को सता रहा डर

चुनाव की घोषणा होने से पहले ही राजद सुप्रीमो की जमानत के लिए काफी प्रयास किए गए थे, लेकिन जांच एजेंसियों के विरोध ने उन्हें बाहर नहीं आने दिया। एनडीए नेताओं ने भी लालू को जेल से निकालने की कोशिशों का विरोध किया था। आधे से अधिक चरण के चुनाव बीत जाने के बाद अब बीजेपी-जेडीयू को लग रहा है कि राजद सुप्रीमो लालू सलाखों के पीछे रहकर गठबंधन को अधिक फायदा पहुंचा गए।

लालू की सजा को राजद ने जमकर भुनाया 

बीजेपी और जेडीयू के इस आकलन के पीछे वजह यह है कि तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी ने लालू को जेल में डालने और उनका जमानत नहीं होने को राजनीतिक मुद्दा बना दिया। लालू के छोटे लाल तेजस्वी और राबड़ी ने इस बात का जोर-शोर से प्रचार किया और लालू को चुनाव के वक्त बाहर नहीं आने देने की पीछे पिछड़ों की आवाज को दबाने का प्रतीक बनाने की कोशिश की और एनडीए की साजिश बताया।
 
वहीं राजद के आरोप को उनकी सहयोगी कांग्रेस ने पूरी हवा दी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव के साथ समस्तीपुर में हुई साझा रैली में लालू प्रसाद को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। जेल में लालू की खराब तबीयत से लेकर उन्हें खराब खाना दिए जाने तक का मुद्दा उठाकर गठबंधन ने पूरे चुनाव में सहानुभूति बटोरने की पूरी कोशिश की। 

इधर एनडीए को यह भी नुकसान हुआ कि लालू के जेल में रहने से वह उनपर सीधा हमलावर नहीं हो सका। बिहार में अब तक एनडीए लालू प्रसाद के सामने उनके विरोधियों को एकजुट करने में सफल होता रहा है, लेकिन इस बार आरजेडी प्रमुख पूरे चुनावी परिदृश्य से दूर रहे तो उसे यह मुद्दा उठाने का मौका कम मिला। हालांकि एनडीए को लगता है कि भले लालू प्रसाद के प्रति थोड़ी बहुत सहानुभूति हो, लेकिन जिस तरह उनके नहीं रहने से गठबंधन बिखरा है, उससे उसे राजनीतिक लाभ होगा।

माय के बाद राजद का मुनिया समीकरण
 
लालू की अनुपस्थिति में राजद की कमान संभाल रहे तेजस्वी यादव के लिए नीतीश कुमार और बीजेपी गठबंधन से अकेले लड़ना संभव नहीं था। सियासी जरूरत ने नई संभावनाओं को जन्म दिया और आरजेडी ने अपना 2.0 वर्जन लॉन्च किया। पार्टी ने राज्य में पहली बार इंद्रधनुष गठबंधन का प्रयोग किया है। गठन के बाद पहली बार है, जब पार्टी केवल 19 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और 21 सीटें सहयोगियों को दी गई हैं।
 
 
गठबंधन के रास्ते पर बढ़ी आरजेडी ने लालू की तर्ज पर माय की तरह मुनिया यानि मुस्लिम, निषाद और यादव समीकरण बनाया है। महागठबंधन ने निषादों का नेतृत्व कर रहे मुकेश सहनी की पार्टी को तीन सीटें दी हैं। वहीं मुस्लिम और यादव पहले से ही उनके साथ है। राजद का यह समीकरण कहीं काम कर गया तो बिहार के डेढ़ दर्जन सीटों के नतीजे प्रभावित हो सकते है।

Find Us on Facebook

Trending News