सुविधा को बेहतर करने की स्वास्थ्य विभाग नहीं दे सका गारंटी, पटना डेंटल कॉलेज में नामांकन में अब नामांकन पर लगी रोक

सुविधा को बेहतर करने की स्वास्थ्य विभाग नहीं दे सका गारंटी, पटना डेंटल कॉलेज में नामांकन में अब नामांकन पर लगी रोक

PATNA : बिहार में एक तरफ तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने ने पटना डेंटल कॉलेज में नए सत्र में नामांकन पर रोक लगा दी है। इसके लिए डीसीआई ने केंद्र सरकार से सिफारिश की है। साथ ही सत्र 2022-23 में नामांकन की मान्यता रद्द करने का प्रस्ताव भी दिया है।

एक साल में तीन बार किया निरीक्षण

बिहार के पुराने डेंटल कॉलेज में शामिल पटना डेंटल कॉलेज में डीसीआई की टीम बीते साल अगस्त 2021 से सितंबर 2022 के बीच तीन बार यहां निरीक्षण के लिए पहुंची थी। प्रत्येक बार टीम के सदस्यों ने कई कमियों को लेकर अपनी आपत्ती दर्ज कराई थी। इन कमियों को तत्काल दूर करने के लिए कहा था। लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई। जिसके बाद डीसीआई ने कॉलेज की मान्यता रद्द करने की सिफारिश केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास कर दी है।

कॉलेज प्रबंधन से मांगा था जवाब

डीसीआई की सिफारिशों पर कार्रवाई से पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने पटना डेंटल कॉलेज के प्राचार्य से पक्ष रखने को कहा था। लेकिन दो दिसंबर तक व्यवस्था में सुधार करने और कमियों को दूर करने को लेकर बिहार के स्वास्थ्य विभाग से कमियों को दूर करने के लिये कोई सहमति पत्र नहीं मिला।  मजबूरी में प्राचार्य ने अपनी तरफ से स्वास्थ्य मंत्रालय को कमियों को दूर करने के लिए सहमति पत्र पेश किया। अब नामांकन को लेकर क्या फैसला लिया जाता है। इसका इंतजार है।

प्राचार्य डा. तनोज कुमार ने बताया  कि नामांकन होगा या नहीं, इसका निर्णय केंद्र सरकार लेगी, लेकिन जिन कमियों को दूर करने को लेकर सरकार से सहमति मांगी गई थी, वह उन्हें नहीं मिला। 

ये कमियां बताई गई

  1. मोबाइल डेंटल वैन नहीं होना
  2. छात्रावास का नहीं होना
  3. ओपीजी एक्सरे मशीन नहीं होना
  4. डिजीटल ओरल डेंटल यूनिट
  5. खून जांच के लिए ऑटो एनालाइजर
  6. सिरामिक लैब उपकरण
  7. कंप्यूटर और प्रिंटर
  8. न्यू डेंटल चेयर यूनिट के साथ
  9. एक्सरे तकनीशियन की कमी
  10.  बीडीएस कोर्स में छात्र-छात्राओं के लिए बॉण्ड का प्रावधान नहीं होना
  11.  आठ में से सिर्फ एक विभाग में पीजी की पढ़ाई होना
  12.  कई अत्याधुनिक और आधुनिक उपकरणों का अभाव


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