पूर्व कानून मंत्री कार्तिक सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी, पटना हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

पूर्व कानून मंत्री कार्तिक सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी, पटना हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

पटना. बिहार के पूर्व कानून मंत्री व विधान पार्षद कार्तिकेय कुमार ऊर्फ कार्तिक सिंह उर्फ़ मास्टर की अग्रिम जमानत की याचिका पटना हाइकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा। इस अग्रिम जमानत की याचिका पर जस्टिस सुनील कुमार पंवार ने सुनवाई की। उन्होंने बुधवार को मामले की सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया. कार्तिक मास्टर को इसी मामले में उलझने के कारण मात्र 15 दिनों में भी मंत्री पद छोड़ना पड़ा था.

ये मामला बिहटा के राजीव रंजन सिंह ऊर्फ राजू सिंह के अपहरण से सम्बंधित मामला है।14नवम्बर, 2014 को बिहटा पुलिस स्टेशन में थाना कांड संख्या 859/2014 रजिस्टर किया गया। ये मामला दानापुर के जुड़ीशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास, अजय कुमार के समक्ष सुनवाई हेतु लंबित हैं। इस मामलें में सूचक सचिन कुमार ने बिहटा थाना में 14 नवंबर,2014 को सूचना दी कि उन्हें टेलिफोन पर ये पता चला है कि उनके चाचा राजीव रंजन सिंह ऊर्फ राजू सिंह का अपहरण हो गया है।

उसने कहा था कि अपहर्ता 18 की संख्या में थे, जो पाँच scorpio गाड़ी से आये थे। उन्होंने राजू को बलपूर्वक ले गए। ये आरोप लगाया गया कि मोकामा के विधायक अनंत सिंह,बंटू सिंह व अन्य सोलह व्यक्तियों ने इसे अंजाम दिया। इससे पहले भी दस करोड़ रुपए की फिरौती मांगे जाने का आरोप लगाया गया था,जिसकी सूचना कृष्णापुरी थाने को दी गई थी।

याचिकाकर्ता ने अपनी अग्रिम जमानत की याचिका में कोर्ट को बताया है कि उनके विरुद्ध जो अन्य आपराधिक मामलें है, उनमें वे जमानत पर है। पटना हाईकोर्ट में 2017 में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, लेकिन उसे 16 फरवरी,2017 को कोर्ट ने नामंजूर कर दिया। उसके बाद उन्होंने अग्रिम जमानत की कोई याचिका पटना हाइकोर्ट में नहीं दायर की।उन्होंने अपनी अग्रिम जमानत की याचिका में ये बताया है कि प्राथमिकी में उनका नाम नहीं था।साथ ही पीड़ित और सूचक ने उनका नाम इस घटना के सम्बन्ध में नहीं लिया था। उन्होंने बताया कि घटना के दिन 14 नवंबर, 2014 को वे सरकारी स्कूल में अपनी ड्यूटी में थे। उनके हस्ताक्षर भी उपस्थिति रजिस्टर में अंकित है।


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