पटना हाईकोर्ट में राज्यपाल कोटे से मनोनीत MLC के मनोनयन पर हुई सुनवाई, कहा नेताओं को समाजसेवी माना जाये या नहीं

पटना हाईकोर्ट में राज्यपाल कोटे से मनोनीत MLC के मनोनयन पर हुई सुनवाई, कहा नेताओं को समाजसेवी माना जाये या नहीं

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने राज्य में राज्यपाल कोटा से मनोनीत किये गए 12 विधान पार्षदों के मनोनयन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि कोर्ट इन मामलों की सुनवाई कर सकता हैं। वरीय अधिवक्ता वसंत चौधरी की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने स्पष्ट   कहा है कि मनोनीत किये गए ये विधान पार्षद को राजनीतिज्ञों को समाजसेवी माना जाए या नहीं, इस मामले पर विचार  करने की जरूरत नहीं। याचिकाकर्ता अधिवक्ता वसंत चौधरी का कहना था कि  इस तरह के मामले में भारत का संविधान के प्रावधानों के तहत साहित्य, कलाकार, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता व सहकारिता आंदोलन से जुड़े हुए विशिष्ट लोगों के मनोनयन हो सकता है। 

जिन बारह लोगों का विधान पार्षद के रूप में  मनोनयन किया गया है ,वे बहुमत बढ़ाने और जो लोग विधान सभा में चुन कर नहीं आ सके हैं, उन्हें विधान परिषद में इस तरह से लाया गया है। यह संविधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इनमें कोई भी न तो सामाजिक कार्यकर्ता है, न ही साहित्य से जुड़ा व्यक्ति या न ही कोई वैज्ञानिक उपलब्धियां हैं। उन्होंने दलील देते हुए कहा था कि एक सामाजिक कार्यकर्ता को काम का अनुभव, व्यवहारिक ज्ञान और विशिष्ट  होना चाहिए।लेकिन इन सब बातों पर गौर नहीं किया गया है। 

चौधरी ने कोर्ट को बताया कि इनमें कोई पार्टी का अधिकारी है, तो कोई कहीं का अध्यक्ष। पिछ्ली सुनवाई मे कोर्ट ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता से पूछा कि क्या मनोनीत किये गए एम एल सी में राज्य के मंत्री पद पर है क्या। विधान पार्षद के रूप में अशोक चौधरी, जनक राम, उपेंद्र कुशवाहा,  डॉ राम वचन राय, संजय कुमार सिंह, ललन कुमार सर्राफ, डॉ राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, संजय सिंह, देवेश कुमार, प्रमोद कुमार, घनश्याम  ठाकुर और निवेदिता सिंह को राज्यपाल के कोटे से मनोनयन किया गया। अब इस मामले पर  अगली सुनवाई 13 सितंबर को की जाएगी।

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