पटना हाईकोर्ट में निचली अदालतों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर दायर याचिका पर हुई सुनवाई, पढ़िए पूरी खबर

पटना हाईकोर्ट में निचली अदालतों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर दायर याचिका पर हुई सुनवाई, पढ़िए पूरी खबर

PATNA : पटना हाईकोर्ट में राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने वरीय अधिवक्ता रमाकांत शर्मा की जनहित याचिका पर  सुनवाई की। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को बताने को कहा कि क्या राज्य के वकीलों के लिए बनने वाले भवनों का निर्माण सरकारी विभाग द्वारा किया जा सकता है या नहीं।


इस मामलें पर कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए शर्मा ने कहा कि भवनों का निर्माण राज्य सरकार के भवन निर्माण विभाग करें,तो काम तेजी से हो सकेगा। ठेकेदारी के काम में बिलम्ब होने के अलावे लागत भी ज्यादा आएगा। याचिकाकर्ता बिहार राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने कोर्ट को बताया कि राज्य के अदालतों की स्थिति अच्छी नहीं है। वरीय अधिवक्ता शर्मा ने कोर्ट को बताया कि राज्य में लगभग एक लाख से भी अधिवक्ता अदालतों में कार्य करते है। लेकिन उनके लिए न तो बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही कार्य करने की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि वकीलों के बैठने और कार्य करने के लिए भवनों की भी काफी कमी है। बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है। उन्होंने कोर्ट को बताया गया कि वकीलों को बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है। शुद्ध पेय जल,शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होती हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अदालतों के भवन के लिए जहां भूमि उपलब्ध भी है,वहां भूमि को स्थानांतरित नहीं किया गया है। जहां भूमि उपलब्ध करा दिया गया है, वहां कार्य नहीं प्रारम्भ नहीं हो पाया हैं।

इससे पूर्व की सुनवाई कोर्ट ने जानना चाहा था कि केंद्र सरकार द्वारा धनराशि उपलब्ध कराई गई है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। कोर्ट ने भूमि उपलब्धता के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध धनराशि का उपयोग नहीं होगा,तो अगले वित्तीय वर्ष में ये धनराशि उपलब्ध नहीं हो पाएगी। इस मामलें पर अगली सुनवाई 10 जनवरी,2023 को की जाएगी।

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