संविदाकर्मियों में भारी आक्रोश : अभी तक नहीं हो पाया सेवा शर्त का निर्धारण, कमेटी के अवधि विस्तार पर फिर हो रहा विचार

संविदाकर्मियों में भारी आक्रोश : अभी तक नहीं हो पाया सेवा शर्त का निर्धारण, कमेटी के अवधि विस्तार पर फिर हो रहा विचार

NEWS4NATION DESK : 24 मार्च 2015 को उच्चस्तरीय समिति का गठन इसलिए किया गया था ताकि राज्य के संविदा कर्मियों को सेवा शर्त से बांधा जा सके, लेकिन कमेटी के लगातार विस्तार के बाद भी अभी तक सेवा शर्त का निर्धारण नहीं हो पाया है।

गौरतलब है कि अब तक चार बार सेवा शर्त कमेटी का अवधि विस्तार हो चुका है। लगता है कि एक बार फिर अवधि विस्तार का ही सहारा लिया जाएगा।

बता दें कि राज्य के संविदा कर्मियों को या दिलासा दिलाया जा रहा है कि जल्द ही सेवा शर्तों का मुकम्मल निर्धारण कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि सेवा शर्त के लिए गठित उच्चस्तरीय कमिटी का कार्यकाल अगस्त में ही पूरा हो गया, लेकिन फिलहाल जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार सेवा शर्त निर्धारण में अभी तक कमी है।

मतलब साफ है कि अब एक बार फिर से कमेटी का अवधि विस्तार किया जा सकता है। क्योंकि जब तक मुकम्मल रिपोर्ट तैयार नहीं हो जाता तब तक कमेटी अपना काम करती रहेगी।

बता दें कि सेवा शर्त के लिए गठित कमेटी ने जब अपना रिपोर्ट सरकार को सौंपा था तो उस दौरान डाटा कर्मियों समेत अन्य संविदा कर्मियों के संबंध में मुकम्मल रिपोर्ट तैयार नहीं होने की वजह से सरकार ने कमेटी को अवधि विस्तार दे दिया था।

उच्च स्तरीय कमेटी की अनुशंसा ओं को कैबिनेट ने मंजूर भी किया था और उसे बिहार गजट में प्रकाशित भी किया गया था, लेकिन विडंबना देखिए कि कमेटी के द्वारा प्रस्तुत की गई अनुशंसा है अभी तक अधिकांश विभागों में लागू नहीं की जा सकी हैं।

बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ गोप गुट के मुताबिक कई चीजों पर अभी तक मसला साफ नहीं हो पाया है। गोप गुट का कहना है कि कमेटी के द्वारा किए गए अनुशंसा का अनुपालन अभी तक नहीं हो पाया है। मसलन कोई संविदा कर्मी अगर सेवा अवधि के दौरान मर जाता है तो आश्रित को 4 लाख अनुग्रह अनुदान देने का भी निर्णय लिया गया था। वही सरकारी कार्य हेतु यात्रा बे व्यय देने का भी प्रावधान किया गया था जिसे बाद में हटा लिया गया। सेवा से हटाए जाने पर अपील करने के प्रावधान की भी अनुशंसा थी, लेकिन इसका भी अनुपालन नहीं किया जा सका है

गौरतलब है कि जहां एक तरफ अनुशंसा का अनुपालन नहीं हो पा रहा है। वहीं दूसरी तरफ उच्च स्तरीय समिति का कार्यकाल भी अगस्त में पूरा हो गया है।

अब देखना होगा कि सरकार आगे क्या रुख अपनाती है।

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