हाय रे सुशासन ! बेटे की याद में बूढ़े माँ-बाप की आंखें अब तो पथरा गई DGP साहब, लेकिन बिहार पुलिस तो शिकायत भी नहीं ले रही

हाय रे सुशासन ! बेटे की याद में बूढ़े माँ-बाप की आंखें अब तो पथरा गई DGP साहब, लेकिन बिहार पुलिस तो शिकायत भी नहीं ले रही

पटना. पिछले नौ महीनों से लापता बेटे को यादकर पटना के गौरीचक थाना क्षेत्र निवासी बूढ़े माँ-बाप की आंखें अब पत्थराने लगी है। बूढ़ी मां की आंखें आज भी दरवाजे पर इस कदर टकटकी लगाए बैठी है कि शायद उनका बेटा राहुल कुमार कहीं से वापस लौट आए। पटना से गौरीचक निवासी शीला देवी और जगन्नाथ राय की आंखों में आज भी आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनका 20 वर्ष का बेटा राहुल कुमार उर्फ संजीव कुमार पिछले 9 महीना से लापता है। अपने बेटे की तलाश में शीला देवी और जगन्नाथ रहने गौरीचक थाने का कई बार चक्कर लगाया लेकिन गौरीचक के पदाधिकारी आवेदन लेने से साफ तौर पर इंकार कर दिया। 

गौरीचक के पदाधिकारी का यह कहना है कि उनका बेटा किसी लड़की के साथ भाग गया है। इधर पति-पत्नी का यह कहना है कि अगर बेटा भाग गया है तो आखिर है कहां। उन्होंने आशंका जताई है कि उनके बेटे के साथ अपहरण के बाद कोई अनहोनी हुई होगी। बेटे के गम में पिछले 9 महीने से मां-बाप के मुंह खाने का निवाला भी ठीक से पार नहीं हो पा रहा है. स्थिति ऐसी है कि दिन भर बेटे की याद में आंख से आंसू टपकते रहते हैं। राहुल कुमार के पिता जगन्नाथ राय बताते हैं कि जब गौरीचक थाना ने आवेदन लेने से इंकार कर दिया तो उन्होंने इसकी जानकारी पटना के वरीय अधिकारियों को दी है। इसके बावजूद भी आज तक उनके बेटा का कोई सुराग नहीं मिला। रा

हुल की मां शीला देवी ने बताया कि उनके तीन बेटों में राहुल कुमार सबसे छोटा बेटा है और वह बीए पार्ट 1 का छात्र है। 20 जनवरी 2022 को अपने घर से जन्मदिन मनाने की बोल कर निकला तो आज तक वापस नहीं लौटा। बेटे के साथ किसी अनहोनी की आशंका से पूरा परिवार डरा सहमा हुआ नजर आ रहा है। इस बात को लेकर गौरीचक थाना प्रभारी कृष्ण कुमार से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया है। उनसे जब यह पूछा गया कि पिछले 2 महीना में आपके थाना क्षेत्र से लगभग आधा दर्जन से अधिक लड़के लड़कियां लापता हुई हैं आप हमें उसकी जानकारी दें.

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा उनके पास फिलहाल समय नहीं है। वह किसी और दिन थाना पर आए हैं या फिर वरीय अधिकारी से इस मामले में संपर्क स्थापित करें। सोचा जा सकता है जब राजधानी के थाना पदाधिकारी का यह हाल है तो दूर-दराज के गांव के थाना पदाधिकारियों का हाल क्या होगा।


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