पुलिसकर्मी के 20 साल से लंबित प्रोन्नति के मामले पर डीजीपी को हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 1995 से ही पुलिस इंस्पेक्टर में प्रोन्नति का आदेश निर्गत करने को कहा

पुलिसकर्मी के 20 साल से लंबित प्रोन्नति के मामले पर डीजीपी को हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 1995 से ही पुलिस इंस्पेक्टर में प्रोन्नति का आदेश निर्गत करने को कहा

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने बीस सालों से लंबित एक पुलिस कर्मी के प्रोन्नति मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य के डी जी पी को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को 26 सितंबर, 1995 की तिथि के प्रभाव से पुलिस इंस्पेक्टर में प्रोन्नति देते हुए आदेश निर्गत करें। जस्टिस पी बी बजन्थरी ने सख्त आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो अगली सुनवाई में डी जी पी, बिहार को उपस्थित होना होगा। पिछली तिथि को जवाबी पूरक हलफनामा एक सप्ताह में दाखिल नहीं किये जाने की वजह से हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर दस हज़ार रुपये का अर्थदंड लगाया था। जस्टिस पी बी बजन्थरी ने याचिकाकर्ता रमाकांत राम की याचिका पर सुनवाई की। 

कोर्ट द्वारा ही विगत 18 नवंबर को डी जी पी सह विभागीय प्रोन्नति कमेटी के अध्यक्ष को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था। हलफनामा में यह बताने को कहा गया था कि 23 सितंबर, 1998 के प्रभाव से सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर के पद पर प्रोन्नत हुए याचिकाकर्ता 26 सितंबर, 1995 के प्रभाव से प्रोन्नति के योग्य थे कि नहीं। इसी हलफनामा में डी जी पी को यह भी बतलाने को कहा गया था कि यदि याचिकाकर्ता द्वारा किये गए दावे के अनुसार प्रोन्नति नहीं दी गई तो, इसकी वजह क्या थी। याचिकाकर्ता बिहार के बंटवारे के बाद झारखंड कैडर का चुनाव किया था और इस तरह से याचिकाकर्ता झारखंड पुलिस का अधिकारी हो गया था।

याचिकाकर्ता ने 11 दिसंबर, 1998 को पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर अपनी याचिका में कहा था कि वह 26  सितंबर, 1995 के प्रभाव से प्रोन्नति के योग्य है। इस तिथि से अनुसूचित जाति में आने वाले इसके जूनियरों की प्रोन्नति दी गई थी। जबकि, याचिकाकर्ता को तीन वर्षों के विलंब के बाद प्रोन्नति दी गई थी।

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