औरंगाबाद में पत्नी की हत्या के आरोप में पति को मिली सजा, आजीवन कारावास के साथ 25 हज़ार रूपये का लगा जुर्माना

औरंगाबाद में पत्नी की हत्या के आरोप में पति को मिली सजा, आजीवन कारावास के साथ 25 हज़ार रूपये का लगा जुर्माना

AURANAGABAD : औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में विशेष न्यायालय एमपी एमएलए कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश अशोक राज ने बुधवार को हसपुरा थाना कांड संख्या 36/18 में सुनवाई करते हुए एकमात्र काराधीन बंदी अभियुक्त हसपुरा के राहुल शर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 


एपीपी वरीय अधिवक्ता कामता प्रसाद सिंह ने बताया कि अभियुक्त राहुल शर्मा को 23 नवम्बर को दोषी करार दिया गया था। आज सज़ा के बिन्दु पर सुनवाई करते हुए एकमात्र काराधीन बंदी अभियुक्त राहुल शर्मा को भादंसं धारा 302 में आजीवन कारावास, 20 हजार जुर्माना, जुर्माना न देने पर चार माह अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई गयी। भादंसं धारा 498 ए मे तीन वर्ष सज़ा, पांच हजार जुर्माना, जुर्माना न देने पर दो माह कारावास,  27 शास्त्र अधिनियम में 07 वर्ष सश्रम कारावास, दस हजार जुर्माना, जुर्माना न भर सकें तो तीन माह अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई। सभी सज़ाए साथ साथ चलेंगी। 

प्राथमिकी सूचक औरंगाबाद मुफ्फसिल थाना के बरेब निवासी बबन सिंह ने 12 मार्च 2018 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया था कि रिंकी कुमारी का शादी 2010 में राहुल से हुई थी। शादी के तीन साल बाद बच्ची होने पर पैसे का डिमांड और मारपीट शुरू हो गया था। 11-12 मार्च को पति द्वारा पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। गांव से मिले सूचना पर पहुंचे तो आरोप सही पाया। आरोपी पति 14 मार्च 2018 से अभिरक्षा में था।

वहीँ औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के एडीजे-15 अमित कुमार सिंह ने बुधवार को 28 साल पुराने डकैती वाद में सज़ा के बिन्दु पर सुनवाई करते हुए एकमात्र अभियुक्त को सज़ा सुनाई है। अभियुक्त देवकुंड थाना के दुलार बिगहा निवासी नरेंद्र सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि सरकार की ओर से एपीओ अरविंद कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि 25 नवंबर को अभियुक्त को दोषी ठहराया गया था। आज सज़ा के बिन्दु पर सुनवाई करते हुए भादंसं 302 में आजीवन कारावास और दस हजार जुर्माना लगाया गया है। भादंसं धारा 394 में दस साल की सजा, दस हजार जुर्माना लगाया है और जुर्माना न देने पर छः माह अतिरिक्त साधारण कारावास होगी। सभी सजाएं साथ साथ चलेंगी। अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि वाद के सूचक हसपुरा के काशीनाथ खत्री ने 08 जून 1994 को प्राथमिकी में कहा था कि कन्हैया लाल खत्री के दुकान में रात्रि 7:30 बजे डकैती के दौरान डकैतो ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

औरंगाबाद से दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट 

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