महागठबंधन की बनेगी सरकार तो नीतीश कुमार को नहीं मिलेगा यह पदभार, तेजस्वी की बढ़ जाएगी ताकत इस बार

महागठबंधन की बनेगी सरकार तो नीतीश कुमार को नहीं मिलेगा यह पदभार, तेजस्वी की बढ़ जाएगी ताकत इस बार

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार दोपहर 12.30 राज्यपाल फागू चौहान से मिलेंगे. ऐसे में अगर उनका इस्तीफा होता है तो यह भी तय है कि राज्य में वे फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे. लेकिन, इस बार वे एनडीए से नहीं बल्कि महागठबंधन की ओर से सरकार बनाएंगे और सीएम पद की शपथ लेंगे. हालांकि सरकार बनाने और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नीतीश कुमार की ताकत पहले जैसी नहीं रह सकती है. यानी मौजूदा एनडीए सरकार में जिस तरह की शक्ति नीतीश को मिली हुई है वैसी शक्ति इस बार महागठबंधन की सरकार में नीतीश के पास नहीं होगी. 

दरअसल सीएम बनकर भी नीतीश की ताकत घटने का मुख्य कारण महागठबंधन में सरकार बनाने का फार्मूला माना जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि नई सरकार बनती है तो नीतीश कुमार भले सीएम बनें लेकिन कई प्रमुख विभागों का जिम्मा राजद और कांग्रेस के पास होगा. इसमें गृह मंत्रालय भी शामिल है. राजद की ओर से जिन कुछ प्रमुख मंत्रालयों की मांग जदयू और नीतीश से की गई है उसमें गृह मंत्रालय सबसे अहम है. 


तेजस्वी यादव को उप मुख्यमंत्री का पद देने के साथ ही उन्हें गृह मंत्रालय का पदभार दिया जा सकता है. राज्य चलाने के लिए सबसे अहम मंत्रालय गृह विभाग को ही माना जाता है. इसीलिए तेजस्वी को अगर गृह मंत्री बनाया जाता है तो यह नीतीश का सरकार में कमजोर होना माना जाएगा. अभी तक एनडीए सरकार में नीतीश कुमार के पास ही गृह मंत्रालय था. 

इसी तरह स्पीकर के पद पर भी राजद की दावेदारी बताई जा रही है. हालांकि मौजूदा एनडीए सरकार में भी भाजपा के विजय कुमार सिन्हा ही स्पीकर हैं. लेकिन महागठबंधन में भी अगर राजद के कोटे में स्पीकर पद जाता है तो यह जदयू और नीतीश का कमजोर होना माना जाएगा. इसके आलावा मंत्रालयों के बंटवारे में भी जदयू से ज्यादा महागठबंधन के सदस्यों को मंत्री बनाने की बात कही जा रही है. यानी नेता नीतीश होंगे लेकिन सत्ता की ताकत राजद यानी महागठबंधन के हाथों में होगी. 

बिहार विधानसभा में सीटों की कुल संख्या 243 है. यहां बहुमत साबित करने के लिए किसी भी पार्टी को 122 सीटों की जरूरत है. वर्तमान आंकड़ों को देखें तो बिहार में सबसे बड़ी पार्टी राजद है. उसके पास विधानसभा में 79 सदस्य हैं. वहीं, भाजपा के पास 77, जदयू के पास 45, कांग्रेस के पास 19, कम्यूनिस्ट पार्टी के पास 12, एआईएमआईएम के पास 01, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के पास  04 सदस्य हैं. इसके अलावा अन्य विधायक हैं.


Find Us on Facebook

Trending News