नीतीश राज में 'सूचना' मांगी तो 'केस' या फिर 'जान' से हाथ धो देंगे ! सरकार ने खुद किया स्वीकार- RTI कार्यकर्ताओं को फंसाने का खेल जारी

नीतीश राज में 'सूचना' मांगी तो 'केस' या फिर 'जान' से हाथ धो देंगे ! सरकार ने खुद किया स्वीकार- RTI कार्यकर्ताओं को फंसाने का खेल जारी

PATNA: बिहार के सुशासन राज में भ्रष्टाचार चरम पर है। बिना चढ़ावे के आम आदमी का कोई काम नहीं होता। भ्रष्टाचार और अफसरशाही के बीच जनता पिस रही है। हर विभाग में सरकारी कर्मी गलत काम कर रहे हैं, फिर भी किसी की क्या मजाल जो सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांग ले। अगर किसी आरटीआई कार्यकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांग भी ली तो उसकी खैर नहीं। सरकारी सिस्टम में फैली गड़बड़ी की अगर किसी ने जानकारी मांगी तो उल्टे उसे ही फंसाने की साजिश रची जाती है.इतना ही नहीं आरटीआई कार्यकर्ता की जान खतरे में पड़ जाती है। बिहार में 2006 से लेकर अब तक 22 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। जबकि 1 हजार से अधिक लोगों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किये गये हैं.  बिहार सरकार बार-बार डीजीपी से लेकर विभागों के सचिव को पत्र भेज आगाह कर रही है. इसके बाद भी आरटीआई कार्यकर्ताओं को झूठे मुकदमों में फंसवाने का काम जारी है. भ्रष्ट अधिकारी पर्दे के पीछे से यह खेल खेलते हैं. एक बार फिर से नीतीश सरकार ने डीजीपी,डीएम,एसपी को पत्र भेज कर कहा है कि सूचना मांगने वालों को प्रताड़ित करने की कोशिश बंद हो। सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र के बाद अन्य विभागों की तरफ से अपने अधिकारियों अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। 

सरकार लेटर का खेल रही खेल...RTI कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमले 

सामान्य प्रशासन विभाग ने एक बार फिर से सितंबर 2022 में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, सभी विभागों के प्रधान सचिव,डीजीपी, सभी प्रमंडल के आयुक्त, डीएम, एसपी को पत्र लिखा है. पत्र में कहा गया है कि सरकार की तरफ से 2007 में ही सूचना मांगने वाले आवेदकों को धारा-107 के तहत फंसाने अथवा प्रताड़ित करने की शिकायत पर आदेश जारी किया गया था. आदेश में कहा गया था कि इस मामले की जांच कराई जाएगी तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कठोर सजा दी जाएगी. इसके बाद फिर 18 सितंबर 2009 को पत्र जारी किया गया. जिसमें कहा गया कि सूचना मांगने वाले व्यक्तियों का सम्मान करते हुए उन्हें सूचना उपलब्ध कराएं. साथ ही गलत आचरण करने वालों को कदाचार में लिप्त होने का दोषी माना जाएगा और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही कर वृहद दंड दिया जाएगा. सूचना मांगने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध झूठी अपराधिक मुकदमे दायर करने संबंधित शिकायत की वरीय अधिकारियों से जांच कराए जी कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर गंभीर अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी.

आज भी जारी है आरटीआई कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने का सिलसिला 

सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र में कहा गया है कि तब यह भी निर्णय था गृह विभाग द्वारा एक हेल्पलाइन स्थापित की जाएगी . जिसका टेलीफोन नंबर सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि झूठे मुकदमे से पीड़ित व्यक्तियों की शिकायत दर्ज हो और उस पर त्वरित कार्रवाई हो सके. सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा 7 दिसंबर 2020 को भी इसे परिचारित किया गया था. इसके बाद भी सूचना के अधिकार के तहत आरटीआई कार्यकर्ताओं, आवेदकों को प्रताड़ित करने तथा उन पर हमला किए जाने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं. सरकार ने सभी अधिकारियों से कहा है कि दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें.सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र के बाद भवन निर्माण विभाग ने सभी अभियंता प्रमुख, अधीक्षण अभियंता,कार्यपालक अभियंता को पत्र लिखकर इस पर ध्यान देने को कहा है। विभाग ने अपने अधिकारियों से कहा है कि आरटीआई कार्यकर्ताओं मांगी गई सूचना की जानकारी दें.  

आरटीआई एक्टिविस्ट ने सरकार की खोली पोल 

बिहार के जाने-माने आरटीआई एक्टिविस्ट शिवप्रकाश राय कहते हैं कि सूबे में आरटीआई कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं हैं. 2006 से लेकर अब 22 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है,जबकि एक हजार लोग जो सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी,उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। केस एससी-एसटी एक्ट से लेकर महिला की आबरू लुटने,सरकारी काम में बाधा डालने व दफ्तर से कागज लेकर भागने का केस किया जाता है.  






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