साहब.....कैसे होगा क्राइम कंट्रोल? बिहार में 53 हजार वारंटी 'गिरफ्त' से बाहर, चार हजार 'कुर्की' आदेश को दबाये बैठी है पुलिस

 साहब.....कैसे होगा क्राइम कंट्रोल?  बिहार में 53 हजार वारंटी 'गिरफ्त' से बाहर, चार हजार 'कुर्की' आदेश को दबाये बैठी है पुलिस

PATNA:  बिहार में अपराध चरम पर है। राजधानी पटना हो या जिला मुख्यालय या फिर सुदूर देहाती इलाका, अपराधियों के आतंक से आमलोग खौफ में हैं। वैसे बिहार के डीजीपी कागजाती डेटा के सहारे बताने की कोशिश में हैं कि अपराध पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। शुक्रवार को जिस तरह से राजधानी पटना में दिनदहाड़े चार करोड़ की सोना लूट अपराधी आराम से फरार हो गये वो इस बात का प्रमाण है कि पुलिस का इकबाल पूरी तरह से खत्म हो गया है। आखिर इकबाल बचे भी तो कैसे.....पुलिस को जो काम है वो तो कर नहीं रही। अगर पुलिस अपनी ड्यूटी ईमानदारी से करती तो न्यायालय के आदेश के बाद भी 53 हजार से अधिक आरोपी पुलिस गिरफ्त से बाहर कैसे रहते? कोर्ट के आदेश के बाद भी 4 हजार कुर्की के मामले लंबित कैसे रहते ? पुलिस इन मामलों को दबा कर बैठी है। 

शिवप्रकाश राय के आरटीआई से खुलासा 

दरअसल, बिहार के जाने-माने आरटीआई एक्टिविस्ट शिव प्रकाश राय ने पुलिस मुख्यालय से जानकारी मांगी थी. पूछा था की आपराधिक मामलों में कितने लोगों के खिलाफ बॉडी वारंट गिरफ्तारी, कुर्की संपत्ति जब्त करने से संबंधित कितने मामले हैं जो न्यायालय आदेश के बाद भी लंबित है?  शिव प्रकाश राय ने इस संबंध में पूरी जानकारी मांगी थी. इसके बाद अपराध अनुसंधान विभाग के पुलिस अधीक्षक ने 31 मई को अप्रैल 2022 तक की पूरी जानकारी दी है. सीआईडी एसपी की रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि बिहार में करीब 53 हजार से भी अधिक फरारी हैं।

कुर्की-गिरफ्तारी वारंट को दबाये बैठी है पुलिस 

आरटीआई एक्टिविस्ट शिवप्रकाश राय की मांगी गई सूचना में यह खुलासा हुआ है कि पुलिस फरार वारंटियों की गिरफ्तारी आदेश को दबा कर बैठी है। अगर न्यायालीय आदेश को दबा कर नहीं बैठती तो कुर्की-जब्ती के 4 हजार मामले पेंडिंग कैसे रहते ? यानी बिहार की पुलिस कोर्ट के आदेश को ठंडे बस्ते में डाल चैन की बांसुरी बजा रही। बिहार पुलिस मुख्यालय ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार कुल 53 हजार से अधिक फरारियों में बक्सर में 5388, आरा में 5040, बांका, 4036, पटना 3678 शामिल है। इसके अलावे शाहाबाद रेंज में11991,तिरहुत रेंज 15899, केंद्रीय रेंज पटना 5052, मगध रेंज 3714, पूर्णिया रेंज 5755 हैं.

फरारी गिरफ्तार नहीं होंगे तो घटना होते रहेगी

आरटीआई एक्टिविस्ट शिवप्रकाश राय कहते हैं कि इसके लिए सरकार दोषी है। अक्षम पुलिस पदाधिकारियों को जिले का कमान संभालने की जिम्मेवारी दी जाती है।  वैसे में कोर्ट का आदेश का पालन कैसे होगा। फरारी को पुलिस अगर गिरफ्तार नहीं करेगी तो वे घटना पर घटना करते रहेगे और पुलिस हाथ मलते रहेगी। वे आगे कहते हैं कि बिहार में थानों की भी नीलामी होतीं हैं, डाक में अधिक बोली लगाने वाले कनीय थाना प्रभारी बन जाते हैं और वरीय देखते रह जाते हैं.

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