गया में कुंवारी बहनों ने माता पिता के साथ मिलकर किया छठ, अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को दिया अर्घ्य

गया में कुंवारी बहनों ने माता पिता के साथ मिलकर किया छठ, अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को दिया अर्घ्य

GAYA : आस्था का महापर्व छठ पूजा का उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही समापन हो गया है। हिंदू धर्म में छठ पूजा को बहुत ही महान पर्व माना जाता है। हर वर्ग के लोग इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। यहाँ तक की इस पर्व को अब विदेशों में भी लोग मनाने लगे हैं। 


भारतीय संस्कृति और हिंदू रीति-रिवाजों के मुताबिक अभी तक शादीशुदा महिलाएं और पुरुष ही इस व्रत को करते आ रहे थे। लेकिन इस महान पर्व में आस्था रखने वाली कुंवारी लड़कियां भी छठ जैसे पवित्र और महान पर्व को करने लगी हैं। 

दरअसल बोधगया प्रखंड के कोशिला गांव के निवासी अरुण कुमार चौबे के दोनों बेटी छठ व्रत का अनुष्ठान किया था। संयोग से दोनों अभी तक अविवाहित है। आदित्य कुमारी उर्फ रितु और पुष्पा कुमारी उर्फ मोनिका दोनों बहने अविवाहित रहते हुए अपने माता-पिता के साथ मिलकर छठ पूजा किया। सोमवार को पिता अरुण कुमार चौबे माता अनुपमा देवी के साथ मिलकर चारों ने उदीयमान सूर्य का अर्घ्य दिया। 

इस पर्व को लेकर आदित्य ने बताया की भगवान भास्कर का पर्व सिर्फ शादीशुदा महिला एवं पुरुष ही करते आए हैं। उसने आगे कहा कि हमलोग इस पर्व के प्रति बहुत ही आस्थावान है। इसलिए समाज की हर बेटी को अपनी संस्कृति को देखते हुए इस पर्व को करना चाहिए। जबकि अनुपमा देवी ने बताया की हमारी मन्नत थी कि दोनों बेटी पढ़ लिखकर अच्छी मुकाम तक पहुंचे और आज इन दोनों ने कुछ कर दिखाया। इसी मन्नत के साथ हम लोगों ने पूरे परिवार के साथ मिलकर छठ पूजा का अनुष्ठान किया है।

बोधगया से संतोष की रिपोर्ट 

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