मन की बात में पीएम मोदी ने गिनाई स्टार्टअप की उपलब्धियां, योग और जल संरक्षण पर दिया जोर

मन की बात में पीएम मोदी ने गिनाई स्टार्टअप की उपलब्धियां, योग और जल संरक्षण पर दिया जोर

DESK. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात के 89 वें एपिसोड में विभिन्न विषयों पर प्रकाश डाला. खासकर उन्होंने स्टार्टअप को लेकर बड़ी बात खी. उन्होंने कहा, 'इस महीने 5 तारीख को देश में यूनिकॉर्न की संख्या 100 के आंकड़े तक पहुंच गई है और आपको तो पता ही है, एक यूनिकॉर्न, यानी, कम-से-कम साढ़े सात हज़ार करोड़ रूपए का स्टार्टअप। आपको यह जानकर भी हैरानी होगी, कि, हमारे कुल यूनिकॉर्न में से 44, पिछले साल बने थे | इतना ही नहीं, इस वर्ष के 3-4 महीने में ही 14 और नए यूनिकॉर्न बन गए।'

उन्होंने कहा- 'इन यूनिकॉर्न का कुल वैल्यूएशन 330 अरब डॉलर, यानी 25 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। इसका मतलब यह हुआ कि वैश्विक महामारी के इस दौर में भी हमारे स्टार्टअप, वेल्थ और वैल्य करते रहे हैं। एक और बात जिसे मैं अहम मानता हूं कि स्टार्टअप की दुनिया न्यू इंडिया को रिफलेक्ट कर रही है। यह छोटे-छोटे कस्बों से भी इंटरप्रिन्योर भी सामने आ रहे हैं। मुझे इस बात का गर्व है कि भारत में बहुत से मेंटर्स हैं जिन्होंने स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में खुद को समर्पित कर दिया है।

उन्होंने योग दिवस को लेकर कहा कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। इसे लेकर पीएम मोदी ने कहा कि- 'विश्व के टॉप बिजनेस पर्सन से लेकर फिल्म से जुड़े लोग और युवा योग को अपना रहे हैं। दुनिया में योग की बढ़ती लोकप्रियता को देखकर आपको अच्छा लगता होगा। इस समय योग दिवस को लेकर हंड्रेड डे काउंट डाउन भी चल रहा है। दिल्ली में सौवें दिन और पिचहत्तरवें दिन काउंटडाउन प्रयोजित किए गए हैं। मैं कहूंगा आप भी अपने यहां योग दिवस की तैयारियां शुरू कर दीजिए। लोगों को प्रेरित करें।'


जल संकट की चिंता पर उन्होंने कहा, "गर्मी बढ़ रही है और इससे पानी बचाने की जिम्मेदारी भी बढ़़ रही है। कई ऐसे जल संकट वाले इलाके हैं, जहां पानी की एक-एक बूंद कीमती है। जल संरक्षण भी अमृत महोत्सव का संकल्प है। देश के हर जिले में 75 अमृत सरोवर बनाए जाएंगे। वो दिन दूर नहीं, जब आपके अपने जिले में ऐसा होगा। युवा इस अभियान के बारे में जानें और जिम्मेदारी उठाएं। आप स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की स्मृति भी इससे जोड़ सकते हैं। कई जगहों पर इस पर काम शुरू हो गया है। यूपी के रामपुर में पटवई में ग्राम सभा की जमीन पर तालाब था। गंदगी से भरा था। कुछ हफ्तों में स्थानीय नागरिकों और स्कूली बच्चों ने इस तालाब का कायाकल्प कर दिया है। ये फव्वारे, फूडकोर्ट और लाइटिंग से सज गया है।

पानी की उपलब्धता और किल्लत किसी भी देश की गति को निर्धारित करते हैं। मन की बात में मैं बार-बार इसकी बात करता हूं। ग्रंथों में कहा गया है कि संसार में जल ही हर एक जीव के जीवन का आधार है। जल ही सबसे बड़ा संसाधन भी है। हमारे पूर्वजों ने जलसंरक्षण के लिए इतना जोर दिया। वेद-पुराण हर जगह पानी बचाने को मनुष्य का सामाजिक और अध्यात्मिक कर्तव्य बताया गया है। इतिहास के छात्र जानते होंगे कि सिंधु, सरस्वती और हड़प्पा संस्कृति में पानी को लेकर कितनी विकसित इंजीनियरिंग होती थी। ये वो समय था, जब जनसंख्या ज्यादा नहीं थी और प्राकृतिक संसाधनों की किल्लत नहीं थी।'


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