तीन साल में पटना-गया-डोभी फोरलेन पर सिर्फ 9 फीसदी ही हुआ काम, पढ़िये पूरी रिपोर्ट

तीन साल में पटना-गया-डोभी फोरलेन पर सिर्फ 9 फीसदी ही हुआ काम, पढ़िये पूरी रिपोर्ट

PATNA : प्रशासनिक लापरवाही का सबसे सशक्त नमूना है पीएम पैकेज के तहत बनने वाला पटना-गया-डोभी एनएच। तीन साल बीतने के बाद सिर्फ 9 फीसदी सड़क का ही निर्माण हो पाया है। जबकि बिहार में पर्यटन के दृष्टिकोण से यह सबसे महत्वपूर्ण हाइवे है। 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री पैकेज में चयनित होने के बाद इस हाइवे को प्राथमिकता से बनाने का निर्णय लेते हुए इसका टेंडर किया गया था। टेंडर के समय इसकी लागत 2265 करोड़ रुपया निर्धारित किया गया था। 2015 के अप्रैल माह में ही इस एनएच को फोरलेन में बदलने की जिम्मेदारी ILFS नामक कम्पनी को दी गयी, लेकिन सरकारी लापरवाही की वजह से शुरू में कम्पनी को जमीन उपलब्ध कराया नहीं गया। बाद में कम्पनी ने ही काम को काफी धीमा कर दिया। बाद में आर्थिक संकट की वजह से निर्माण एजेंसी ने काम ही छोड़ दिया। 

अप्रैल 2018 में पूरा करना था काम

अप्रैल 2015 में शुरू हुए इस हाइवे निर्माण को अप्रैल 2018 में समाप्त कर देना था। लेकिन सरकारी लापरवाही की वजह से जहां 127 किलोमीटर का नेशनल हाइवे फोरलेन तीन साल में बन जाना था वहां  सिर्फ 15 किलोमीटर पर ही फोरलेन बन पाया। अब स्थिति यह है कि 2265 करोड़ की लागत से बनने वाला यह फोरलेन की लागत 5464 करोड़ रुपये हो गयी। 

कैसे बनेगा फोरलेन,अभी जमीन भी उपलब्ध नहीं करवा पाया है जिला प्रशासन

एनएच को फोरलेन बनाने के लिये 707 हेक्टेयर जमीन अधिगृहित कर जिला प्रशासन को निर्माण एजेंसी को उपलब्ध कराना था लेकिन पिछले तीन साल में तीन जिला प्रशासन के द्वारा 545 हेक्टेयर जमीन ही उपलब्ध कराया गया है।

बता दें कि एनएचआई ने इस नेशनल हाइवे को तीन भाग में बांटकर पुनः टेंडर किया है।

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