उपचुनाव में होगा असली खेला, एनडीए में पता चलेगा कि कौन है गुरु और कौन है चेला ?

उपचुनाव में होगा असली खेला, एनडीए में पता चलेगा कि कौन है गुरु और कौन है चेला ?

NEWS4NATION DESK : उपचुनाव में किशनगंज से भाजपा का लड़ना तय हो गया है। किशनगंज विधानसभा उप चुनाव के के लिए प्रत्याशी के नाम पर विचार चल रहा है। संभावना है किस स्वीटी सिंह की उम्मीदवारी के नाम पर मुहर लग जाए। हालांकि चार लोगों की कमेटी या सर्वे करने में लगी है कि टिकट किसे दिया जाए।

उपचुनाव में 5 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं, जिसमें किशनगंज की सीट भाजपा को दी गई है। बाकी 4 सीटों पर भाजपा की सहयोगी जदयू चुनाव लड़ रही है। गौरतलब है बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर जीत का श्रेय लेने का बराबर होड़ बना रहता है। चाहे वह उपचुनाव हो या मुख्य चुनाव।

अब सवाल उठता है कि गठबंधन के तहत लड़ने वाले दलों में आखिर किसके पास कितनी क्षमता है। जो अपने मित्र दल को वोट ट्रांसफर करा सकें। उपचुनाव में किशनगंज विधानसभा में इसकी   असली अग्नि परीक्षा होनी है। वोट ट्रांसफर करने की पूरी औकात यहां पता चलने वाला है।

पिछले चुनाव में भाजपा उम्मीदवार स्वीटी सिंह को 57970 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस के डॉक्टर जावेद को 66522 वोट मिले थे। अगर यदि अपना वोट ट्रांसफर करवा पाने में सक्षम हो जाती है तो भाजपा उम्मीदवार की जीत आसान हो जाएगी। 

मतलब ऐसे समझिए कि नीतीश कुमार की पार्टी बार-बार अल्पसंख्यकों को लेकर यह दावा करती रहती है की इनके वोटर हमारे साथ हैं, लेकिन क्या किशनगंज की सरजमीं पर सियासत की चाल में जदयू अपना वोट भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में ट्रांसफर करवा पायेगा। इसी तरह दरौंदा बेलहर नाथनगर और सिमरी बख्तियारपुर में भी भाजपा की अग्नि परीक्षा है कि क्या जदयू के पक्ष में भाजपा वोट ट्रांसफर करवा पाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो लोकसभा चुनाव में भाजपा अपना दम दिखा चुकी है।

नीतीश कुमार भले ही यह दम भर लें की लोकसभा चुनाव में बिहार में जीतने वाले उम्मीदवारों को सरकार के काम का इनाम भी मिला है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि बिहार में लोकसभा चुनाव के परिणाम मोदी लहर के असर की वजह से हुआ है।

कुल मिलाकर उप चुनाव के ठीक पहले जब नीतीश के नेतृत्व पर ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के द्वारा सवाल उठाया जा रहा है और एनडीए का भविष्य अधर में लटकता दिखाई दे रहा है। उसी स्थिति में उपचुनाव में असली खेला होने वाला है।

खासकर किशनगंज उपचुनाव में क्योंकि वहां अल्पसंख्यकों के वोट को भाजपा के पक्ष में ट्रांसफर करवाना है। जाहिर सी बात है उपचुनाव में होने वाली जीत और हार या तो एनडीए में दरार पैदा करेगा या फिर दम भर देगा कुल मिलाकर कौन गुरु होगा और कौन चेला। 

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