चौथे चरण में भी जीविका कैडरों और दीदियों ने जमकर दबाया नोटा

चौथे चरण में भी जीविका कैडरों और दीदियों ने जमकर दबाया नोटा

पिछले तीन चरणों के चुनाव में जीविका कैडरों और दीदियों ने राज्य सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में जमकर नोटा का बटन दबाया था. तत्पश्चात आज चौथे चरण में भी दरभंगा, उजियारपुर,समस्तीपुर, बेगुसराय और मुंगेर में जमकर नोटा का बटन दबाया है. संघ ने यह निर्णय बिहार सरकार द्वारा जीविका के जमीनी स्तर पर काम करने वाले की मांगे पूरी नहीं करने का निर्णय लिया गया था. सब जानते है कि “जीविका” ने महिला सशक्तिकरण की अलख जगाने के साथ साथ गांवों की तस्वीर और तक़दीर बदलने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. केंद्र या राज्य सरकार द्वारा दिए गए हरेक दायित्व को पूरा करने में इनके द्वारा कोई कसर नही छोड़ी जाती है. चाहे वो सामाजिक या आर्थिक सशक्तिकरण हो या फिर वित्तीय साक्षरता, शराबबंदी, मानव श्रृंखला, मनरेगा सर्वेक्षण, विद्यालय सर्वेक्षण या स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय निर्माण ही क्यों न हो. सबों में जीविका में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं (कैडरों) और जीविका दीदीयों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया है और इनको सफल बनाकर एक कीर्तिमान स्थापित किया है. 

संघ बिहार सरकार के समक्ष विभिन्न माध्यमों से सभी कैडरों को जीविका की ओर से नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र और निर्धारित ड्रेस, मानदेय “कंट्रीब्यूशन सिस्टम” पर अविलंब रोक, मानदेय का भुगतान नियमित और बैंक खाते में एवं काम से हटाने की धमकी पर रोक लगे और धमकी देने वाले पर सख्त क़ानूनी कार्रवाई हो सहित अपनी 10 सूत्रीय जायज मांगों को रखी थी लेकिन सरकार ने इसे वार्ता के बाद भी अनसुना कर दिया. शायद उन्हें हमारे संघ की ताकत का एहसास नहीं था. यही हाल सूबे की विपक्षी सरकार ने भी किया. 

विपक्ष होने के नाते हमारी मांगों को उचित प्लेटफार्म पर विपक्ष को उठाना चाहिए था परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया इसलिए बिहार प्रदेश जीविका कैडर संघ ने यह निर्णय लिया है की लोकसभा चुनाव 2019 में अपनी ताकत, एकता, अखंडता को साबित करने के लिए सूबे बिहार के जीविका से जुड़ी लगभग एक करोड़ जीविका दीदियों और कैडर वोटिंग के दिन स्वेक्षा से नोटा का बटन दबाकर अपनी चट्टानी एकता को साबित करेंगे. 

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