पिछले 30 साल में जिस काम को करने की 5-5 पीएम नहीं दिखा पाए हिम्मत, मोदी ने उसे कर दिखाया

पिछले 30 साल में जिस काम को करने की 5-5 पीएम नहीं दिखा पाए हिम्मत, मोदी ने उसे कर दिखाया

NEWS4NATION DESK :  पुलवामा हमले का बदला भारत द्वारा लिया जा चुका है। वहीं विंग कमांडर अभिनंदन की वतन वापसी हो गई है। ऐसा नहीं है कि देश में आतंकी घटना कोई पहली बार हुई है या कोई सैन्य अधिकारी पहली बार पाकिस्तान द्वारा बंदी बनाया गया था। इससे पहले भी कई बार आतंकी हमले हुए है और सैन्य अधिकारी को बंदी या किसी बड़े शख्सियत को आतंकियों द्वारा कब्जे में लिया गया है। लेकिन इससे पहले के आतंकी हमले का इस तरह से जबाव कभी नहीं दिया गया। वहीं कई मौकों पर आतंकियों की बात मानकर उनकी रिहाई की गई। 

पिछले 30 साल में एक-दो नहीं बल्कि पांच-पाच प्रधानमंत्रियों के शासन काल में ऐसे कई मौके आए। लेकिन उनकी हिम्मत आतंकियों या आतंक के पनाहगार पाकिस्तान को इस तरह की जबाव देने की नहीं हुई जैसा कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने दिखाया। 

पुलवामा हमले के बाद पीएम मोदी ने जब-जब जो कहा उसे अमली जामा पहनाया। जबकि इससे पहले जब भी ऐसे मौके आए हमारे देश के प्रधानमंत्रियों ने सिर्फ रक्षात्मक रवैया ही अपनाया था। ऐसा नहीं है कि इस बार पाक की ओर से पहले वाले हथकंडे ऩहीं अपनाए गए, लेकिन देश के प्रधानमंत्री ने उसे सिरे नाकार दिया और उसके घर में घुसकर पुलवामा हमले का जबाव दिया। इतना ही नहीं एकबार फिर विंग कमांडर अभिनंदन के कब्जे को लेकर पाकिस्तान की ओर से ब्लैकमेलिंग की कोशिश की गई। पाक पीएम इमरान ने कई बार संदेश दिया कि वह भारत के साथ वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन पीएम मोदी आतंकवाद और अपने विंग कमांडर की रिहाई पर किसी तरह की कोई बातचीत करने से साफ इंकार कर दिया। अंतत: हर मोर्चे पर विफल पाक की इसबार कोई चाल कामयाब नहीं हुई और उसे जेनेवा समझौते के तहत विंग कमांडर अभिनंदन को सुरक्षित भारत को वापस करना पड़ा और ऐसा संभव हो पाया पीएम मोदी के सख्त और कड़े कदम की वजह से। 

आइए अब आपको इतिहास की ओर लिए चलते है जब पाकिस्तान और आतंकियों द्वारा इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया और उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्रियों ऐसी हिम्मत दिखाने की जगह रक्षात्मक रवैया अपनया। 

वर्ष 1989 के दिसंबर महीने में केन्द्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद का अपहरण कर लिया गया था। रूबिया की रिहाई के बदले अपह्ताओं ने आतंकियों को छोड़ने की मांग रखी। उस वक्त देश के प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह थे। अपह्ताओं पर कार्रवाई की हिम्मत दिखाने की जगह उन्होंने उनकी बात को मानना ही मुनासिब समझा। 

बीपी सिंह के बाद देश की बाग़डोर कांग्रेस के समर्थन से समाजवादी पार्टी के चंद्रशेखर के हाथ में आई। उनके शासनकाल 1990 में एकबार फिर केन्द्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज की बेटी का अपहरण हुआ। इसबार सोज की बेटी की रिहाई के बदले जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकियों की रिहाई की मांग रखी गई। इसबार भी कोई सख्त हिम्मत दिखाने की जगह आतंकियों के बात को ही माना गया और जेकेएलएफ के आतंकियों को छोड़ दिया गया। 

1993 में कांग्रेस के पी.वी नरसिम्हा राव के शासनकाल में श्रीनगर के हजरतबल दरगाह बंधक मामले में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के बदले उन्हें सुरक्षित रास्ता मुहैया कराया गया। 

1999 में देश की बागडोर बीजेपी के हाथ में आई। देश के प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी बाजपेयी। बाजपेयी ने अपने शासनकाल में पाक के साथ रिश्ते सुधारने के प्रयास किए, लेकिन उसी वक्त कंधार विमान अपहरण कांड हुआ। यात्रियों की रिहाई के बदले जैश टॉप कमांडर मसूद अजहर जो आज भारत के लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है उसे छोड़ने की मांग रखी। सरकार ने उस वक्त पिछले तीन-तीन प्रधानमंत्रियों के रास्ते पर चलना ही मुनासिब समझा और कार्रवाई के बदले उसे रिहा कर दिया। जिसकी कीमत आजतक चुकाई जा रही है। 

वर्ष 2008 में पीएम मनमोहन सिंह के शासनकाल में मुंबई में आतंकी हमले हुए। हालांकि पीएम मनमोहन सिंह हमले का जबाव देना चाहते थे, लेकिन उनके ही रक्षा मंत्री ए.के एंटनी यह कहते हुए ऐसा करने से मना कर दिया कि इससे युद्ध भड़क सकता है। कांग्रेस के आलाकमान द्वारा भी एंटनी का पक्ष लिया गया और मनमोहन सिंह कुछ नहीं कर पाए। 

लेकिन इसबार ऐसा कुछ नहीं हुआ। पुलवामा हमले के बाद ही पीएम ने साफ तौर पर कहा कि इसबार आतंकियों ने बहुत बड़ी गलती कर दी और इसकी उन्हें बड़ी कीमत चुकानी होगी। घटना के ठीक 12 दिन बाद एयर स्ट्राइक हुआ और जैश के ठिकाने को खत्म कर दिया गया। 

एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की ओर से हिमाकत की गई। जिसका माकूल जवाब दिया गया। इसमें हमारे देश के एक विंग कमांडर पीओके में जा गिरे और उसे बंदी बनाकर पाक द्वारा एकबार फिर ब्लैकमेलिंग की कोशिश की गई। लेकिन इसबार उनके किसी बात को पीएम मोदी ने मानने से साफ इंकार कर दिया और अंत में पाक को बिना शर्त विंग कमांडर अभिनंदन को रिहा करना। यह सारी बाते पिछले 30 साल में पहली बार हुई। 

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