बड़हिया में प्रमुख चुनाव में सियासी सूरमाओं से सफेदपोशों तक की प्रतिष्ठा दांव पर, चुनाव के पहले 'लापता' हुए कई पंचायत समिति सदस्य

बड़हिया में प्रमुख चुनाव में सियासी सूरमाओं से सफेदपोशों तक की प्रतिष्ठा दांव पर, चुनाव के पहले 'लापता' हुए कई पंचायत समिति सदस्य

लखीसराय. पंचायत समिति के सदस्य पद के जीते हुए प्रत्याशियों के बीच अब प्रखंड प्रमुख पद के लिए जोड़-तोड़  एवं धमकी और धमकाने की राजनीति शुरू हो गई है। इससे जिले का बड़हिया प्रखंड भी अछूता नहीं दिख रहा। चुनाव की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही प्रमुख प्रतिद्वंद्वी एक दूसरे के खिलाफ साम, दाम, दंड, भेद की सारी रणनीति आजमा रहे हैं। कहा जाए तो प्रमुख का चुनाव धनबल और बाहुबल का नंगा नाच बना हुआ है। डर ऐसा कि कोई भी पंचायत समिति सदस्य मुंह खोलने को तैयार नहीं है। वहीं भीतरखाने जोड़तोड़ की जुगत में लगे लोग मुंहमांगी रकम देकर अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में हैं। वहीं कई पंचायत समिति सदस्य इन दिनों 'लापता' बताए जा रहे हैं, संभव है उनका उदय अब मतदान के समय ही हो।

बड़हिया प्रखंड में अब तक दिख रहे चुनावी समीकरण में संभवतः दो ही पंचायत समिति सदस्य चुनाव जीतने के बाद प्रमुख बनने की जुगत में लगे हैं। इसको लेकर प्रखंड में प्रमुख पद के लिए राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। संभावित दावेदार व उनके समर्थक नवनिर्वाचित पंचायत समिति सदस्यों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक पंचायत समिति सदस्य ने कहा, जो भी सीधी बात से नहीं मान रहे हैं उन्हें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बाहुबली एवं अन्य क्षेत्रीय दबंगों द्वारा अपने पक्ष में मतदान करवाने को लेकर डराने एवं धमकाने का सिलसिला जोड़ों पर है। बड़हिया प्रखंड के 9 पंचायतों में हुए चुनाव में कुल 13 पंचायत समिति सदस्य निर्वाचित हुए हैं।

समीकरणों की बात करें तो मुख्य रूप से निवर्तमान प्रखंड प्रमुख मधु देवी एवं इंदु देवी के बीच ही प्रखंड प्रमुख को लेकर आमने सामने की टक्कर है। दोनों प्रत्याशी प्रमुख पद पाने के लिए पंचायत समिति सदस्यों से अपनी दावेदारी पेश करने के लिए समर्थन जुटाने की कवायद भी तेज कर दी है। चूंकि निवर्तमान प्रमुख और उनके पति पिछले 10 साल से निर्वाचित हैं, ऐसे में उन्हें एन्टीइनकम्बेंसी की चुनौती भी झेलनी है। चुनौती अपने अब तक के कार्यों पर फिर से भरोसा दिलाने की है। चुनौती नई उम्मीद और सपने के साथ मैदान में उतरे प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ खुद को श्रेष्ठ साबित करने की भी है।

प्रमुख चुनाव अक्सर 'बड़े राजनेताओं' के वर्चस्व स्थापित करने का भी चुनाव होता है। देखा जाए तो प्रमुख का चुनाव भी इस वर्चस्व का गवाह बना हुआ है। पर्दे के पीछे से गुपचुप तरीके से कई बड़े नाम अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। स्थिति है कि धमकी और डराने धमकाने के कारण निर्वाचित पंचायत समितियों में भय व्याप्त है इससे भी कोई इनकार नहीं कर रहा। आए दिन बिहार में निर्वाचित प्रतिनिधियों की हत्या बढ़ती जा रही है। ठीक उसी तरह पूर्व से सत्ता सुख भोग चुके प्रतिनिधि को नए चेहरे की मौजूदगी से अपनी कुर्सी जाने का भय सता रहा है क्योंकि प्रत्याशी के बीच नवनिर्वाचित प्रतिनिधि ही पहली पसंद हैं।

बड़हिया की बात करें तो नए चेहरे को दबाने के लिए सारे महारथी चुनावी समर की चक्रव्यूह रचना करने में जुट गए हैं। बड़हिया प्रखंड के प्रमुख चुनाव के ताजा हालात पर अगर बात की जाय तो कुछ भी हो सकता है, इसका डर सबको बना हुआ है। प्रशासन को भी इस पर पैनी नजर रखनी होगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्याशी जत्था बना कर निर्वाचित प्रत्याशियों के घर पर जा रहे हैं और अपने पक्ष में मतदान करने को लेकर उन पर दबाव बना रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस चुनावी समर के तिलिस्म को तोड़ कर कौन विजेता का ताज अपने नाम करता है।

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