राशन कार्ड बनाने के नाम पर साइबर अपराधियों ने पूछा ओटीपी, खाते से उड़ा दिए हजारों रूपये

राशन कार्ड बनाने के नाम पर साइबर अपराधियों ने पूछा ओटीपी, खाते से उड़ा दिए हजारों रूपये

CHHPRA : दो वक्त की रोटी की जुगाड़ करने के लिए कड़ी मेहनत करने वाले जिले के हजारों गरीब आज भी राशन कार्ड से वंचित है। जबकि अमीर और अमीर होते जा रहे हैं। सारण में पक्के मकान और अय्याशी की जीवन जीने वाले को भी राशन कार्ड मुहैया हो चुका है। वे सरकारी अनाज उठाकर बाजारों में बेच देते हैं और उस रुपए से अन्य कार्य कर रहे हैं। लेकिन गरीबों को खाने के लिए भी अनाज नहीं मिल रहा है। यदि ठीक से जांच हो तो सारण में 30 फ़ीसदी कार्ड अमीरों के हैं। जिनके पास सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध है और वे एपीएल के दायरे में है। इसके बावजूद सरकार का करोड़ों रुपया इन पर खर्च हो रहा है। इधर साइबर ठग भी गरीबों को निशाना बना रहे हैं और उनके अकाउंट से उनकी मेहनत की कमाई उड़ा रहे हैं। राशन कार्ड बनाने के लिए गरीब साइबर कैफे में भी लूटे जा रहे हैं। एक फॉर्म भरने के लिए उनसे 100 से ₹200 लिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं राशन कार्ड के लिए जो नए नियम लगाए गए हैं। ऐसे में अब नए कागजातों को बनाने के लिए भी उन्हें कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है और उनका आर्थिक दोहन हो रहा है।


नियमों में बदलाव, अब ये प्रमाण पत्र जरूरी

सारण के विभिन्न प्रखंडों में स्थित साइबर कैफे में राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन करने को लेकर भीड़ लगी है। कुछ दिनों पहले तक आवेदक आधार कार्ड, बैंक की पासबुक व पहचान पत्र संलग्न कर आवेदन ऑनलाइन करा देते थे। लेकिन, अब साइबर कैफे वाले आवेदकों से उक्त दस्तावेजों के अलावा जाति, आय व निवास प्रमाण पत्र की भी मांग कर रहे हैं। दरअसल सरकार ने आवेदन करने के लिए 3 कॉलम बढ़ा दिया है। ऐसे में उनका कहना है कि आवेदन में इन तीनों प्रमाण पत्र का कॉलम बढ़ा दिया गया है, तो बिना इसके आवेदन मान्य नहीं होगा। ऐसे में आवेदन निरस्त होने की भी आशंका है। सदर प्रखंड के सैकड़ों जरूरतमंद लोगों ने राशन कार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन साइबर कैफे से कराया है। उस समय आय, निवास, जाति प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन अब  साइबर कैफे वाले उक्त प्रमाण पत्रों की मांग कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में धारकों ने सरकार के प्रति नाराजगी दिखाते हुए कहा कि इस बारे में सरकार को पहले ही जानकारी दे देनी चाहिए थी, ताकि लोग प्रमाण पत्र बनवाकर समय से आवेदन कर सकें। 

अतिरिक्त खर्च ने बढ़ाई परेशानी

साइबर कैफे पर इक्कठा लोगों ने बताया कि हम लोग राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन करने आए हैं। साइबर कैफे वाले जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र मांग रहे हैं। इन दस्तावेजों के नहीं रहने पर आवेदन ऑनलाइन नहीं हो पा रहा है। वहीँ प्रमाण पत्र बनवाने पर अधिक खर्च लगने पर भी लोग परेशान हैं। पहले आधार कार्ड, बैंक की पासबुक, पहचान पत्र अटैच कर आवेदन हो जाता था। अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों ने पहले आवेदन किया है, उनका आवेदन निरस्त नहीं होगा। सभी के आवेदन निकलवाए जाएंगे, साथ ही जांच भी की जाएगी। जांच में जो आवेदक पात्र होंगे उनका राशन कार्ड बनाया जाएगा। अब जो भी व्यक्ति आवेदन करेंगे। उसके साथ जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र जरूर संलग्न करें। 

राशन कार्ड के नाम पर साइबर अपराध

जिले में राशन कार्ड बनवाने को लेकर साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को ठगा जा रहा है। उनके द्वारा राशन कार्ड बनाने के नाम पर लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड व एटीएम कार्ड के नंबर लेकर राशि निकाली जा रही है। अब तक आधा दर्जन लोगों के साथ ठगी हो चुकी है। जिले में साइबर क्राइम का एक गिरोह सक्रिय है। उसके सदस्य लोगों को फोन कर राशन कार्ड बनाने की बात कहते हैं। उसके बाद जानकारी लेकर कहा जाता है कि कार्ड के लिए आनलाइन अप्लाई कर दिया गया है। ठगी के शिकार हुए अजय यादव , सुमित्रा देवी ने बताया कि राशन कार्ड बनवाने के नाम पर आधार कार्ड, पैन कार्ड व एटीएम कार्ड के नंबर लेकर मोबाइल के जरिए उनके बचत खाते से 5 हजार रुपये निकाल लिए गए। पासबुक अपडेट कराने पर उन्हें राशि निकाले जाने का पता चला। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक-एक रुपये जोड़कर बैंक में राशि जमा की थी। शहर के गुदरी बाजार निवासी सुमित्रा देवी को फोन कर राशन कार्ड बनाने के नाम पर आधार कार्ड, पैन कार्ड व एटीएम कार्ड के नंबर लेकर मोबाइल के जरिए उनके बचत खाते से 5 हजार रुपये निकाल लिए गए। वहीँ जिले के बनियापुर प्रखंड निवासी सर्वेश ठाकुर के खाते से भी आनलाइन 10 हजार रुपये की निकासी कर ली गई है। उन्हें भी राशन कार्ड बनवाने को लेकर फोन आया था। जबकि एकमा प्रखंड के बलिया निवासी सुमेश भारती को फोन कर बताया गया कि आपका आवेदन रिजेक्ट हो रहा है। तत्काल आधार कार्ड व मोबाइल पर ओटीपी नंबर बताएं। नंबर बताने के बाद खाते से 2 हजार रुपये की निकासी कर ली गई।

छपरा से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट 

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