वायनाड में राहुल का लेफ्ट के साथ-साथ एनडीए के इस हिन्दू चेहरे से होगा मुकाबला, जीत की राह होगी कठिन

वायनाड में राहुल का लेफ्ट के साथ-साथ एनडीए के इस हिन्दू चेहरे से होगा मुकाबला, जीत की राह होगी कठिन

NEWS4NATION DESK : केरल का वायनाड सीट इस लोकसभा चुनाव एकाएक बड़ी चर्चा में आ गया है। वायनाड के राष्ट्रीय पटल पर चर्चित होने की वजह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का यहां से चुनाव लड़ने का एलान है। अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की जीत को सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने अमेठी के साथ-साथ वायनाड से राहुल के चुनाव लड़ने का एलान किया है। लेकिन इस सीट से भी राहुल के जीत की राह कठिन होने के आसार दिखने लगने हैं। 

दरअसल लेफ्ट ने जहां इस सीट से राहुल को हराने की बात कही है वहीं, बीजेपी ने भी इस सीट पर राहुल को घेरने की योजना बना ली है। राहुल के वायनाड सीट से लड़ने के एलान के बाद बीजेपी ने इस सीट से केरल में अपनी सहयोगी पार्टी भारत धर्म जनसेना (बीडीजेएस) के अध्यक्ष तुषार वेल्लापल्ली को कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारने जा रही है। सोमवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इस बात का एलान करते हुए कहा कि तुषार त्रिशूर की जगह वायनाड से लड़ेंगे।

बता दें कि राज्य में बड़े हिंदू समुदाय का प्रतिनिधत्व करने वाले बीडीजेएस के दम पर एनडीए गठबंधन को यहां बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। एनडीए में शामिल बीडीजेएस को केरल में 5 सीटें मिली हैं। तुषार को पहले त्रिशूर से टिकट दिया गया था और वह प्रचार भी शुरू कर चुके थे। हालांकि उन्होंने तब यह कहा था कि अगर राहुल गांधी वायनाड से चुनाव लड़ते हैं तो पार्टी की उम्मीदवारी में कुछ बदलाव किया जा सकता है। 

कौन हैं तुषार वेल्लापल्ली
 बीडीजेएस के गठन के पीछे राज्य के प्रभावशाली संगठन श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (एसएनडीपी) के नेता थे। यह संगठन राज्य में सबसे ज्यादा आबादी वाले हिंदू ग्रुप- एझावा पिछड़ा समुदाय (करीब 20.9%) के कल्याण के लिए काम करता है। एसएनडीपी के महासचिव वेल्लाप्पली नतेशन हैं, जो केरल के प्रभावशाली लोगों में से हैं। तुषार वेल्लाप्पली नतेशन के बेटे हैं।

एसएनडीपी का सामाजिक और राजनीतिक रुतबा
 दक्षिणी और मध्य केरल में एसएनडीपी का सामाजिक और राजनीतिक रुतबा है। कई पार्टियों के नेता नतेशन के दरवाजे जाते रहे हैं। हाल ही में सबरीमाला मुद्दे को लेकर केरल के सीएम विजयन भी चर्चा करने पहुंचे थे। केरल की स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार नतेशन ने पिछले साल सबरीमाला कर्मा समिति की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि यह हिंदुओं के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। नतेशन का इशारा सबरीमाला मुद्दे पर ऊंची जातियों के प्रतिनिधियों की मीटिंग पर था। वह कई मौकों पर लेफ्ट और कांग्रेस, दोनों की आलोचना कर चुके हैं।

2014 में हुआ था कांटे का मुकाबला

 वायनाड लोकसभा सीट के तहत सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इस संसदीय क्षेत्र में मनंतावडी, तिरुवंबडी, वानदूर, सुल्तानबथेरी, एरनाड, कलपत्ता और निलंबूर विधानसभा सीटें आती हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को वायनाड लोकसभा सीट पर महज 20,870 वोटों के अंतर से जीत हासिल हुई थी।

 कांग्रेस कैंडिडेट एमआई शानवास को एलडीएफ (सीपीएम) के सत्यन मोकेरी से कुल पड़े वोटों में से 1.81 प्रतिशत ज्यादा मत हासिल हुए थे। शानवास को 3,77,035 और मोकेरी को 3,56,165 वोट मिले थे। वहीं, बीजेपी के पीआर रस्मिलनाथ को 80,752 मत हासिल हुए थे। यूडीएफ यानी कांग्रेस को यहां 41.2 प्रतिशत और एलडीएफ को 39.39 प्रतिशत वोट मिले थे।

 

 

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