भारत का प्रथम आम चुनाव, 75 राजनीतिक दलों ने आजमाया हाथ, कैसे शुरू हुआ सत्ता का खेल. देश के चुनावी सफर की पढ़िए पूरी रपट.....

NEWS4NATION DESK : गुलामी की बेड़ियां कट चुकी थी। भारत एक आज़ाद मुल्क की हैसियत हासिल कर चुका था। देश चलाने के लिये एक व्यवहारिक संविधान अस्तित्व में आ चुका था। कहा जाता है कि संविधान राजनीतिक व्यवस्था का खाका मात्र न होकर आम जनता की आस्थाओं एवं मान्यताओं की अभिव्यक्ति करता है। बिल्कुल इसी तर्ज पर जनता अपने वोटों की अभिव्यक्ति के लिये तैयार हो गयी।

प्रथम आम चुनाव 1951- 52

भारत जैसे नवजात आज़ाद मुल्क के लिये प्रथम आम चुनाव लोकतंत्र के इतिहास में एक साहसिक प्रयोग था। अप्रैल 1950 में संविधान सभा द्वारा चुनाव कानून पारित किए जाने के बाद से चुनाव की तैयारियां प्रारम्भ कर दी गई। सुकुमार सेन भारत के प्रथम चुनाव आयुक्त नियुक्त किये गए। चुनाव आयोग के द्वारा मतदाता सूची तैयार की गई। 17 करोड़ 30 लाख मतदाता पंजीकृत हुए। चूकी राजनीतिक विकास की यात्रा यानी राजनीतिकरण की प्रक्रिया से देश पहली बार दो-चार हो रहा था, अतः खासतौर पर अशिक्षा, राजनीतिक अपरिपक्वता को ध्यान में रखते हुए मतदान की पद्धति बहुत सरल रखी गयी। 

4 माह लगा था चुनाव संपंन होने में

मतदान केंद्रों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के चुनाव चिन्ह वाली मतपेटियां रखते हुए व्यवस्था की गयी कि मतदाता जिस उम्मीदवार को वोट डालने चाहें, उसके चुनाव चिन्ह वाली मतपेटी में अपना मत डाल दें। बता दें कि प्रथम आम चुनाव को सम्पन्न कराने में (25 अक्टूबर 1951 ------ 21 फरबरी 1952) 4 माह का लंबा समय लगा था। 17 करोड़ 30 लाख वोटरों के सामने 489 सीटों के लिये 1864 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाने का फैसला लिया था। कुल 75 राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे, जिसमे राष्ट्रीय दलों की संख्या 14 थी।

10.45 करोड़ रुपये हुए थे खर्च

सरकार ने प्रथम आम चुनाव पर 10.45 करोड़ रुपये खर्च किये। चुनाव संचालन के लिये 5 लाख 60 हजार कर्मचारियों की नियुक्ति की गई। मतदान प्रतिशत 61.16 रहा, जो पहले चुनाव दृष्टिकोण से काफी अच्छा था। भारतीय लोकतंत्र अपने प्रथम चुनावी यात्रा को सफलतापूर्वक सम्पन्न कर चुका था।

कांग्रेस को मिला था विराट बहुमत

प्रथम आम चुनाव के परिणामस्वरूप कांग्रेस को अखिल भारतीय स्तर पर विराट बहुमत हासिल हुआ। लोकसभा के 489 सीटों में से 364 पर कांग्रेस ने अपना विजय पताका लहराया। संसदीय व्यवस्था के तहत जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारत की पहली सरकार ने अपना आकार ग्रहण कर लिया।

शेष अगली कड़ी में......

कौशलेंद्र प्रियदर्शी

Find Us on Facebook

Trending News