सऊदी अरब ने तबलीगी जमात पर लगाया प्रतिबंध तो भारतीय मौलाना हुए गुस्से से लाल

सऊदी अरब ने तबलीगी जमात पर लगाया प्रतिबंध तो भारतीय मौलाना हुए गुस्से से लाल

नई दिल्ली. सऊदी अरब ने तबलीगी जमात को मुसलमानों के लिए खतरनाक और आतंकवाद के द्वार खोलने का दमखम रखने वाला संगठन बताया है. सऊदी अरब की मिनिस्ट्री ऑफ इस्लामिक अफेयर्स ने बाकायदा ट्वीट कर अपने देश के नागरिकों को इस संगठन से दूर रहने की हिदायत दी है. इतना ही नहीं सऊदी अरब की मिनिस्ट्री ऑफ इस्लामिक अफेयर्स ने अपने देश के मस्जिद के मौलवियों और इमाम को स्पष्ट रूप से कहा है कि वे देश के नागरिकों को जागरूक करें जिससे इस संगठन की विचारधारा का सऊदी अरब में प्रसार नहीं हो. 

सऊदी अरब सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि देश में तबलीगी जमात से जुड़े जो लोग अभी अलग अलग मस्जिदों में हैं वे अगले जुमे (शुक्रवार) की नमाज से पहले मस्जिदें खाली कर दें. सऊदी अरब की मिनिस्ट्री ऑफ इस्लामिक अफेयर्स ने 6 दिसंबर को एक के बाद एक कई ट्वीट किए. इसमें लिखा है, मस्जिद के मौलवियों और इमाम को निर्देश दिया जाता है कि वे तबलीगी जमात और द वाह (Da’wah) ग्रुप (जिसे  सऊदी में अल हबाब कहा जाता है) के प्रति लोगों को जागरूक करें. सऊदी सरकार के मुताबिक ये संगठन समाज के लिहाज से खतरनाक है और देश में आतंकवाद के द्वार खोलने का दमखम रखता है.

वहां की सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि यह एक ऐसा संगठन है जो समज के लिए खतरनाक और देश में आतंकवाद बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. सऊदी सरकार ने तबलीगी जमात के गलत काम को देश के नागरिकों के बीच ज्यादा से ज्यादा बताने की बात कही है. 

हालाँकि सऊदी अरब सरकार के फैसले का उनके देश में भले व्यापक विरोध नहीं हो रहा लेकिन भारत में कई लोगों ने इस निर्णय की आलोचना की है. न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के कुछ अन्य देशों में फैले तबलीगी जमात के लोगों ने भी सऊदी सरकार ने निर्णय का विरोध शुरू कर दिया है. भारत में तबलीगी जमात के नेता मुफ्ती अकबर हाशमी ने सऊदी सरकार पर भ्रामक प्रचार और मिथ्या दोष मढने का आरोप लगाया है. उन्होंने वहां की सरकार के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि तबलीगी जमात का आज तक कहीं कोई आतंक से जुड़ा इतिहास नहीं है. ऐसे में सऊदी सरकार का निर्णय हैरान करता है. 

गौरतलब है कि तबलीगी जमात खुद को एक प्रकार का धर्म प्रचार का संगठन बताता है. इसका इतिहास भारत से जुड़ा है. वर्ष 1927 में दिल्ली में इस्लामिक धर्म प्रचार के मकसद से इसका गठन हुआ था. आज तक इस संगठन पर कभी कोई आतंकी गतिविधि में संलिप्त रहने का आरोप नहीं लगा है. 

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