संवेदनहीनता : नवादा में सूदखोरों ने ली छह लोगों की जान, कर्ज से परेशान परिवार ने की सामूहिक खुदकुशी, इलाज के दौरान छोटी बेटी की भी मौत

संवेदनहीनता : नवादा में सूदखोरों ने ली छह लोगों की जान, कर्ज से परेशान परिवार ने की सामूहिक खुदकुशी, इलाज के दौरान छोटी बेटी की भी मौत

नवादा. जिले में जहर खाने से परिवार के छठे सदस्य की भी मौत हो गई। मृतक केदारलाल की 16 वर्षीय पुत्री साक्षी ने भी पावापुरी विम्स में दम तोड़ दिया। 14 घंटे तक वह अस्पताल में जिंदगी-मौत के बीच जंग करती रही। आखिरकार वह भी जंग हार गई। परिवार के छठे सदस्य की मौत की खबर आते ही शोक की लहर दौड़ गई।

कर्ज से परेशान केदारनाथ सहित परिवार के छह सदस्यों ने जहर सेवन कर लिया था। इसमें घर के मुखिया 50 वर्षीय केदार लाल गुप्ता, 47 वर्षीय पत्नी अनिता कुमारी बेटा 16 वर्षीय प्रिंस बेटी 20 वर्षीय शबनम कुमारी, बेटी 17 वर्षीय गुड़िया कुमारी शामिल है, जबकि एक छोटी बेटी की हालत चिंताजनक बनी हुई थी। उसकी भी मौत हो गयी है।

जिले में कर्ज के चलते परिवार समेत आत्महत्या करने वाले परिवार के मुखिया ने मार्मिक सुसाइड नोट लिखा है। इसमें परिवार के मुखिया ने अपनी परेशानी का जिक्र करते हुए महाजनों की प्रताड़ना की चर्चा की है। दो पन्नों के नोट में कर्ज देने वाले छह लोगों के नाम का जिक्र करते हुए उन्हें देश-समाज का दीमक बताया है। कहा है कि ऐसे लोग पूरे देश को दीमक की तरह चांट कर बर्बाद कर रहे हैं। 

परिवार समेत खुदकुशी कर लिखा सुसाइड नोट

परिवार के मुखिया केदार ने 8 नवंबर को यह सुसाइड नोट लिखा है, जो घटना के एक दिन पहले की है। नोट में केदार ने लिखा है उन्होंने कुछ लोगों से कर्ज लिया था। इसमें छह महाजन लगातार परेशान कर रहे हैं। शहर के न्यू एरिया मोहल्ले के मनीष सिंह, विकास सिंह, विजय सिंह, टुनटुन सिंह खटाल, डॉ. पंकज सिन्हा और गढ़ पर मोहल्ला के रणजीत सिंह से उन्होंने कर्ज लिया था। सुसाइड नोट में लिखा है कि पांच-छह साल से महाजन कर्ज के लिए परेशान कर रहे थे। कर्ज का दुगना-तिगुना ब्याज जमा कर चुके थे। फिर भी कर्ज खत्म नहीं हुआ। 

'सुसाइड नोट में जिक्र है कि कर्ज चुकता करने को महाजनों से मोहलत मांग रहे थे। साल-छह महीने का वक्त मांग रहे थे, लेकिन कर्ज देने वाले कुछ भी सुनने-समझने को तैयार नहीं थे। पिछले पांच-छह सालों से लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। ब्याज नहीं देने की स्थिति में गाली गलौज करते थे। जिससे विवश होकर यह गलत कदम उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी लिखा कि कर्ज देने वाले समाज का कीड़ा है, जो समाज को बर्बाद कर रहे हैं। कर्ज देने वाले छहों लोगों ने कई लोगों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। ऐसे दीमकों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है।


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