सुशासन है या लूटतंत्र? कोरोना जांच में ही घोटाले नहीं हुए...परिवहन विभाग में भी हुआ बड़ा घपला,'खास' को बचाने के लिए डंप करा दी फाइल

सुशासन है या लूटतंत्र? कोरोना जांच में ही घोटाले नहीं हुए...परिवहन विभाग में भी हुआ बड़ा घपला,'खास' को बचाने के लिए डंप करा दी फाइल

PATNA:  बिहार में तरह-तरह के फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के मामले सामने आते हैं। नीतीश राज में अफशरशाही का आलम यह है कि करोड़ों का घोटाले की फाइल दबा दी जाती है। अब कोरोना जांच में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ तो देश भर में बिहार की भद्द पिट गई। मामला राज्यसभा में भी उठा और सभापति ने मामले को गंभीर बता केंद्र सरकार को जांच कराने की सलाह दे दी। भद्द पिटने के बाद नीतीश सरकार ने एक्शन लिया और लाज बचाने के लिए सिविल सर्जन समेत कई अफसरों को नाप दिया।लेकिन कोरोना जांच में गड़बड़ी ही नहीं बल्कि कई विभागों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और घोटाला हुआ लेकिन अफसर जांच के नाम पर फाइल को दबा कर बैठ जाते हैं। परिवहन विभाग में भी करोड़ों का घोटाला हुआ लेकिन जांच के नाम पर बड़े अधिकारी 4 महीनों से फाइल डंप करने में जुटे हैं. खुलासे के इतने दिन बाद भी जांच वाली फाइल सचिवालय में धूल फांक रही है।

 बड़े अधिकारी CM नीतीश की इमेज पर पोत रहे कालिख

सिर्फ कोरोना जांच में ही नहीं बल्कि हर विभाग में भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला जा रहा। बार-बार करप्शन से समझौता नहीं करने के बड़े दावे करने वाले नीतीश कुमार के सुशासन राज में नाक के नीचे ही कुछ बड़े लोगों के संरक्षण में भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला जा रहा था। सब कुछ इतने तरीके से था कि किसी को कुछ दिनों तक पता ही नहीं चला।लेकिन यह खेल न्यूज4नेशन की टीम की नजर में जैसे ही आई तो इसका पर्दाफाश हो गया।अब लक्ष्य यह है कि इसे अंजाम तक पहुंचाया जाये। इसी सिलसिले में न्यूज4नेशन ने पटना के DTO ऑफिस में सितंबर 2020 को बड़े स्तर पर गड़बड़ी का खुलासा किया था. बता दें पटना के तत्कालीन डीटीओ और एक क्लर्क की मिलीभगत से करोड़ों की सरकारी राशि का वारा-न्यारा किया गया था। साहब और बाबू ने मिलकर नीतीश सरकार के कथित सुशासन को तार-तार किया था। बताया जाता है कि इस बड़े गड़बड़झाले की कमाई ऊपर तक पहुंचती थी। लिहाजा पटना डीटीओ ऑफिस में दोनों हाथ से सरकारी राजस्व की भारी लूट हुई और सचिवालय तक बाबूओं और हाकिमों ने मिल-बांट कर खूब खाया। मामले का खुलासा भी हुआ,मीडिया में घोटाले की खबर भी आ गई,आई वॉश के लिए जांच भी बिठाई गई....।लेकिन 2020 से 2021 आ गया पर जांच की गाड़ी एक कदम भी नहीं बढ़ी। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इस घोटाले में जिला से लेकर विभाग तक के अधिकारी मिले हुए हैं.सुशासन राज में इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद भी एक्शन नहीं होने से अब तो यह प्रमाणित होने लगा है. एक कहवात है कि 'हम्माम में सब नंगे हैं' यह चरितार्थ हो रहा है। अब तो यह ठोक कर कहा जा सकता है भ्रष्टाचार की हवेली में बैठे सुशासन राज के अधिकारी ही सीएम नीतीश की इमेज पर कालिख पोतने में जुटे हैं.  


...जवाब दे सरकार- इतने दिन बाद भी जांच क्यों नहीं हुई पूरी 

न्यूज4नेशन ने इस संबंध में जांच अधिकारी से लेकर जांच संबंधी आदेश देने वाले अधिकारी से जानकारी मांगी। लेकिन कोई अपडेट नहीं मिला।आखिर जानकारी देंगे भी तो क्या देंगे....जांच की गाड़ी बढ़ी ही नहीं होगी। यानि पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश अब सचिवालय स्तर से की जा रही है। राजद भी कह रहा कि कथित सुशासन राज में अफसरशाही से सुनियोजित भ्रष्टाचार किया जा रहा है।तेजस्वी यादव ने सुशासन राज में चहुंओर भ्रष्टाचार पर सीधा हमला बोला है सीएम नीतीश को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा है कि अरबों का कोरोना घोटाला सामने आने के बाद नीतीश जी दिखावटी तौर पर जैसा कि पूर्व के 61 घोटालों में करते आए है छोटे स्तर के कर्मचारियों को बर्खास्त करने का नाटक रच, धन उगाही कर JDU को चुनावी चंदा देने वाले उच्च अधिकारियों को बचायेंगे। यही नीतीश कुमार की स्थापित नीति, नीयत और नियम है। 

18 नवंबर को परिवहन आयुक्त ने क्या कहा था?

बिहार के परिवहन आयुक्त ने 18 नवंबर को न्यूज4नेशन से बातचीत में कहा था कि पटना डीटीओ ऑफिस में फर्जीवाड़े को लेकर जो जांच टीम गठित की गई थी उसने अभी अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। हमने भी उस संबंध में कोई जानकारी नहीं ली है। उन्होंने बताया कि चुनाव की वजह से जांच में देरी हुई है। अब नई सरकार बन गई है और जांच टीम जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई के संबंध में जानकारी देंगे।जानकार बताते हैं कि 22 दिन बाद भी अब तक जांच टीम ने जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है।

तत्कालीन डीटीओ-कर्मी पर भारी गड़बड़ी का आरोप

तत्कालीन डीटीओ अजय कुमार ठाकुर और लिपिक अमित कुमार गौतम पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगे थे। 17 सितंबर 2020 को ही मामले का खुलासा हुआ था। इसके बाद लाज बचाने के लिए परिवहन विभाग की तरफ से जांच टीम गठित की गई थी। लेकिन इतने दिन बीत गए अब तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। ऐसे में अब तो जांच टीम पर ही गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. बताया जाता है कि जांच टीम मामले को रफा-दफा करने में जुटी है। परिवहन आयुक्त का कहना था कि चुनाव की वजह से थोड़ी देरी हुई है यह कहे हुए भी महीनों बीत गए लेकिन सरकार के नाक के नीचे पटना डीटीओ में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि जांच टीम ने ही बचाने की सुपारी ले ली है।ऐसे ही अधिकारी सीएम नीतीश के सुशासन को तार-तार कर रहे।

जानिए पूरा मामला

पटना के तत्कालीन डीटीओ-कर्मी की मिलीभगत से वाहन BS-4 वाहन का बिना सरकारी राजस्व के ही निबंधन और चोरी की गाड़ी का भी निबंधन किया गया था. इस कारनामें से सरकार को पचास करोड़ से अधिक के राजस्व की क्षति हुई थी। इसके साथ ही तत्कालीन डीटीओ अजय कुमार ठाकुर और कर्मी अमित कुमार गौतम पर कई अन्य आरोप लगे थे। वर्तमान डीटीओ ने 17 सितंबर को  अपनी रिपोर्ट परिवहन कमिश्नर को भेज दिया था,जिसमें पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारी और कर्मी पर कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था। डीटीओ के घोटाले वाले पत्र के बाद परिवहन कमिश्नर ने जांच के लिए कमेटी बनाई थी। तत्कालीन डीटीओ और कर्मी ने हर गुनाह किये लेकिन परिवहन विभाग के आलाधिकारी मौन साधे रहे। करोड़ों के इस खेल का खुलासा होने के बाद परिवहन विभाग ने इज्जत बचाने के लिए जांच टीम तो बैठाई लेकिन अब तक टीम आगे नहीं बढ़ पाई इतने दिन भी अब तक जांच टीम ने क्या जांच किया,यह अब तक किसी को पता नहीं। ऐसे में बड़ा सवाल खड़े हो रहे कि क्या चहेते सरकारी कर्मियों को बचाने की साजिश तो नहीं ? अब तो जांच कमेटी ही सवालों के घेरे में आ गई है। बड़ा सवाल यही कि पटना डीटीओ में हुए घोटाले की जांच करने वाली टीम 80 दिनों से क्या कर रही है? कहीं रखूखदार अफसर और कर्मी को बचाने की चाल तो नहीं ? 

कंपनी ने गाड़ी बनाई नहीं और डीटीओ ने कर दिया निबंधन

अब एक नई फर्जीवाड़ा से परिवहन विभाग के पटना डीटीओ दफ्तर प्रतिष्ठा तार-तार हुई है। पटना डीटीओ में जिस चेचिस नंबर की गाड़ी का निबंधन हुआ वह गाड़ी महिंद्रा कंपनी ने बनाई ही नहीं और निबंधन भी कर दिया गया। इसका खुलासा सोनपुर थाने में जब्त वाहन की जांच में हुआ है .उक्त स्कॉपियो वाहन का निबंधन 27 जून 2017 को हुआ था. स्कॉर्पियो वाहन निबंधन संख्या बीआर 01 पीजी- 8228 पटना डीटीओ में निबंधित है.

तत्कालीन डीटीओ-कर्मी की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा

जांच में पता चला है कि जिस चेचिस नंबर से निबंधन किया गया है उसका तो निर्माण ही नहीं हुआ है. पटना डीटीओ में हुए ऑडिट में उक्त वाहन पर टैक्स जमा नहीं होने का ऑब्जेक्शन लगाया गया था. वाहन के निबंधन के  समय तत्कालीन डीटीओ अजय कुमार ठाकुर थे, जिन पर पहले भी भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे हैं. अजय कुमार ठाकुर के कार्यकाल में सहायक अमित कुमार गौतम की देखरेख में ही पूरा निबंधन का काम होता था. जानकारों का कहना है कि इस दौरान सैकड़ों वाहनों का रजिस्ट्रेशन बिना टैक्स जमा किए गलत तरीके से हुआ.

सोनपुर थाने ने जब पत्र भेजा तो पटना डीटीओ में मचा हड़कंप

इधर, सोनपुर थाने में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने पटना डीटीओ को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है. इस में निबंधित कार्ड पर अंकित वाहन का चेचिस नंबर भेज कर तहकीकात की गई. सोनपुर थाना के अवर निरीक्षक प्रतिमा कुमारी ने बताया था कि पटना डीटीओ ने सारी जानकारी उपलब्ध कराई है. गलत चेचिस नंबर पर पटना डीटीओ में निबंधन का खेल हुआ है.


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