दो साल हो गए कोरोना महामारी को, अभी तक मॉक ड्रिल कर इलाज के तरीके ही सीख रहा बिहार का स्वास्थ्य विभाग

दो साल हो गए कोरोना महामारी को, अभी तक मॉक ड्रिल कर इलाज के तरीके ही सीख रहा बिहार का स्वास्थ्य विभाग

HAJIPUR : पिछले दो साल से देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। तीसरे फेज में भी हर दिन लाखों मरीज मिल रहे हैं. लेकिन इतना समय गुजरने के बाद भी बिहार के स्वास्थ्य विभाग अभी भी पूरी तरह से यह समझ नहीं सका है कि कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में मरीजों को किस प्रकार भर्ती करना है। दो साल बाद भी स्वास्थ्य अमला अपने कर्मियों को इस बात का ट्रेनिंग देने में पैसे बर्बाद कर रही है, साथ ही समय भी बर्बाद कर रही है। एक तरफ कोरोना महामारी से बचने के लिए देश और दुनिया कोविड- वैक्सीन तैयार कर  लोगों को वैक्सीनेशन कर सुरक्षित कर ली है तो दूसरी तरफ बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य अधिकारी, अभी करुणा मरीज को इलाज और बचाने के लिए मॉकड्रिल  करते दिख रहे हैं।

मॉकड्रिल की क्या है जरुरत

कोरोना के दूसरे फेज के पहले पूरे राज्य में हर जगह मरीजों के इलाज के लिए किस प्रकार के इंतजाम होने चाहिए, इसको लेकर मॉक ड्रिल कराया गया था। ताकि सभी स्वास्थ्यकर्मी इससे अवगत हो सकें। इसमें अभी मुश्किल से छह माह का समय गुजरा है। अब कोरोना के थर्ड वेव आ गया है तो एक बार फिर से बिहार का स्वास्थ्य विभाग मॉक ड्रिल के नाम पर जनता के पैसों के साथ अपना समय भी बर्बाद कर रही है। सवाल यह है कि छह माह में ही क्या कर्मी भूल गए कि कोरोना ग्रसित मरीजों को इलाज कैसे करना है। जबकि पिछले दो साल से शायद ही कभी कोई दिन ऐसा रहा होगा जब कोरोना को लेकर चर्चा नहीं हुई होगी।

बता दें कि तीसरे फेज को लेकर सभी जिलों के सदर अस्पताल में मॉक ड्रिल कराया जा रहा है। हाजीपुर के सदर अस्पताल में भी यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। जहां पूरे अस्पताल के डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी पूरे मुस्तैदी से , एक मरीज को कोविड- संक्रमित बनाकर उसे एंबुलेंस अस्पताल लाकर पूरी मुस्तैदी से उसका इलाज करते दिख रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो इससे महामारी के दौरान आनेवाली स्थिति से निपटने में सहायता मिलेगी


 REPORTED BY VIKASH MAHAPATRA

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