जब अरूण जेटली ने संसद में रोक लिया था रघुवंश बाबू का रास्ता, मुस्कुराकर कहा था- तो कैसा चल रहा है वन मैन ऑपोजिशन ?

जब अरूण जेटली ने संसद में रोक लिया था रघुवंश बाबू का रास्ता, मुस्कुराकर कहा था- तो कैसा चल रहा है वन मैन ऑपोजिशन ?

Desk: पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह का दिल्ली एम्स में रविवार को निधन हो गया. तबीयत खराब होने के बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था. रघुवंश प्रसाद सिंह एम्स के ICU में भर्ती थे. चार दिन पहले ही उन्होंने आरजेडी से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद लालू यादव ने जेल से उन्हें छिट्ठी लिखकर कहा था कि अभी आपको कहीं नहीं जाना है. आप स्वस्थ होकर वापस आए तो हम बैठक कर बात करेंगे, लेकिन रघुवंश बाबू वापस आने से पहले ही दुनिया को अलविदा कह गए.

रघुवंश प्रसाद सिंह 1996 में केंद्र की राजनीति में आ चुके थे लेकिन उन्हें असली पहचान मिली 1999 से 2004 के बीच. 1999 के लोकसभा चुनाव में शरद यादव और लालू प्रसाद यादव आमने सामने थे. बिहार की सबसे चर्चित सीट से शरद यादव जीतने में कामयाब रहे. 1999 में जब लालू प्रसाद यादव हार गए तो रघुवंश प्रसाद को दिल्ली में राष्ट्रीय जनता दल के संसदीय दल का अध्यक्ष बनाया गया. केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी. रघुवंश प्रसाद सिंह विपक्ष की बेंच पर बैठे थे. संसद की कार्यवाही में जाते हुए रघुवंश प्रसाद सिंह को अरुण जेटली ने रोक लिया. मुस्कुराते हुए बोले, 'तो कैसा चल रहा है वन मैन ऑपोजिशन?

रघुवंश प्रसाद सिंह को समझ में नहीं आया. अरुण जेटली ने उस दिन का एक अंग्रेजी अखबार उनकी खिसका दिया. अखबार में चार कॉलम में रघुवंश प्रसाद की प्रोफाइल छपी थी. इसका शीर्षक था, 'वन मैन ऑपोजिशन.' 1999 से 2004 के रघुवंश प्रसाद संसद के सबसे सक्रिय सदस्यों में से एक थे. उन्होंने एक दिन में कम से कम 4 और अधिकतम 9 मुद्दों पर अपनी पार्टी की राय रखी थी. यह एक किस्म का रिकॉर्ड था. उस दौर में वाजपेयी सरकार को घेरने में रघुवंश प्रसाद सिंह सबसे आगे नजर आते थे. इस तरह से उन्होंने केंद्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई.


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