जब मांझी ने मझधार में फंसा दी नाव, आखिर महागठबंधन में VIP क्यों बन गए सहनी

PATNA:  आखिरकार महागठबंधन का महामंथन खत्म हो गया और राजद सांसद मनोज झा ने सीट शेयरिंग को लेकर एलान कर दिया है. एक तरफ NDA  का फार्मूला 17-17-6 है वहीं महागठबंधन का फार्मूला 20-9-5-3-3 है. लेकिन खबर तो ये है कि आखिरकर ऐसा क्या हुआ कि महागठबंधन के VIP मुकेश सहनी बन गए.

हाल ही में राजनीतिक पार्टी बनाने वाले राजनीति के नए चेहरे मुकेश सहनी को महागठबंधन में काफी वीआईपी ट्रीटमेंट मिला लिहाजा पहली बार चुनाव लड़ने वाली मुकेश सहनी की पार्टी कांग्रेस और वाम दल को पछाड़ते हुए महागठबंधन में अपनी मजबूत जगह बना ली. तो क्या यह माना जाए कि तेजस्वी यादव के साथ रहने का मुकेश सहनी को फायदा हुआ ?

वहीं खबर तो ये भी है कि महागठबंधन की नाव बीच मझधार में मांझी की वजह से फंसी थी. NDA छोड़ने के बाद पूर्व सीएम जीतन राम मांझी महागठबंधन में शामिल हुए तो बिना शर्त के थे लेकिन जैसे जैस चुनाव नजदीक आते गए उन्होंने अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए. महागठबंधन में अपनी अहमियत राजद और कांग्रेस को दिखाते हुए उन सीटों की मांग कर डाली जहां पर कांग्रेसियों का गढ़ कहा जाता है. मांझी की यही डिमांड ने महागठबंधन को सोचने की स्थिती में लाकर खड़ा कर दिया था. जिस कारण सीटों के बंटवारे को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई थी. आखिरकार जीतनराम मांझी की मांग के आगे कांग्रेस को झुकना पड़ा और औरंगाबाद, गया सीट का बलिदान करना पड़ा. हकीकत तो यही है कि गया और औरंगाबाद पिछले 4 दशक से कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है.  



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