वोट के लिए कुछ भी करेगा, मनोज तिवारी ने वोट मांगने के लिए गाया गाना, जब महिला शिक्षक ने किया था फरमाइश तो कर दिया था बेइज्जत

वोट के लिए कुछ भी करेगा, मनोज तिवारी ने  वोट मांगने के लिए गाया गाना, जब महिला शिक्षक ने किया था फरमाइश तो कर दिया था बेइज्जत

News4Nation... साम, दाम, दंड और भेद अगर इन शब्दों का प्रयोग राजनीति और राजनीतिक दलों के नेताओं पर खूब फब्ता है कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। नेतागण जनता से वोट मांगने के समय अपनी उन सभी गलतियों को भूल जाते हैं, जो अपने कार्यकाल के दौरान करते हैं। ऐसी ही एक बानगी भागलपुर के कहलगांव में तब देखने को मिली जब जनता से वोट मांगने के लिए भोजपुर गायक और दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने अपने संबोधन से पूर्व गाना गया। मनोज तिवारी कहलगांव विधानसभा भाजपा प्रत्याशी पवन यादव के पक्ष में सभा को संबोधित करने आए थे। मनोज तिवारी आज अपने संबोधन से पहले उस वाक्ये को भूल गए, जब दिल्ली में आयोजित एक ऐसे ही कार्यक्रम मंच पर महिला शिक्षक ने उनसे गाने की फरामाइश कर दी। लेकिन मनोज बाबू ये पब्लिक है सब जानती है। 

यहां गौर करने वाली बात यह है कि बिहार में जब चुनाव के समय वोट लेना है तो मनोज तिवारी यह शायद भूल गए कि वह एक सांसद हैं। हम यहां इसलिए भागलपुर के कहलगांव का जिक्र कर रहे हैं, क्योंकि दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर जब एंकरिंग कर रही महिला टीचर ने संबोधन से पूर्व उनसे गाना गाने की फरामइश की तो उन्हें खड़े-खड़े ही तमीज सीखने की बात कह डाली। वो यहीं नहीं रूके उन्होंने महिला टीचर को मंच पर से बेइज्जत कर नीचे उतार दिया और वहां मौजूद अधिकारियों को महिला शिक्षक पर र्कारवाई करने के आदेश मौके पर ही दे डाले। 


अनुष्का के लिए गाया लगइलू जब लिपस्टिक

वहीं, दूसरा वाक्या तब देखने को मिला था, जब बनारस में एक कार्यक्रम के दौरान शाहरूख खान के साथ घुटनों के बल बैठ कर अनुष्का शर्मा के लिए गीत गाए। मनोज तिवारी के ष्लगइलू जब लिपस्टिकष् गाने पर जमकर वहां मौजूद लोगों के साथ मस्ती भी की। हालाकि इस बात को लेकर खूब बवाल भी मचा और उन्हें महिला विरोधी तक बता दिया गया। वहीं, जब उनसे इस बात को लेकर पूछा गया तो उन्होंने इस बात को खींचने का सारा जिम्मा अपने विरोधियों पर डाल दिया। 

भाजपा नेताओं के कथनी और करनी में फर्क

अब भागलपुर के कहलगांव में चुनावी सभा के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या मनोज तिवारी राजनीति में दो पैमानों पर चलते हैं। चुनाव के समय वोट मांगने के वक्त क्या वे सांसद की गरिमा को भूल जाते हैं, या फिर वोट पाने के लिए कुछ भी करेगा। भाजपा के ऐसे नेताओं को देखकर ही उनके कथनी और करनी में फर्क का पता चलता है। 



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