सदन से लेकर सड़क तक सवर्ण हितों का विरोध करनेवाली पार्टी राजद की सरकार में जाति पूछकर की जाती थी पिटाई,आज रच रहे हैं ढोंग

सदन से लेकर सड़क तक सवर्ण हितों का विरोध करनेवाली पार्टी राजद की सरकार में जाति पूछकर की जाती थी पिटाई,आज रच रहे हैं ढोंग

PATNA : जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा है कि चुनाव के समय सवर्ण समाज से आने वाले राजद के कुछ छूटभैये नेता सवर्ण समाज से चुनाव में राजद और महागठबंधन को वोट देने की अपील कर रहे हैं। लेकिन सवर्ण समाज यह बात नहीं भूला है की राजद ने सड़क से लेकर सदन तक गला फाड़-फाड़ कर सवर्ण आरक्षण यानी सवर्ण हितों का विरोध किया है।

लालू प्रसाद यादव का चेहरा जमाने से छिपा नहीं है। जिनकी राजनीति का आधार ही रहा है समाज मे विभाजन करना। समाज को बांटने वाली राजनीति ही लालू यादव के कुनबे की पहचान रही है। यह वही लालू प्रसाद हैं जब इन्हें सत्ता हासिल था तो बिहार के ग्रामीण इलाकों में जाति पूछकर पिटाई की जाती थी। तेजस्वी यादव बताएं कि भूरा बाल साफ करो का नारा किसने दिया। कैसे जातियों के नाम पर नरसंहार से बिहार चीत्कार उठता था। उसके बाद सत्ता के गलियारे में तेज आवाज गूंज उठती थी कि हम नहीं जाएंगे चुकी वहां ........मारा गया है। 

सत्ता के शीर्ष पर बैठा इंसान अगर हैवान बन जाये तो भला उस राज्य को कौन बचा सकता है। बिहार अपने किस्मत को कोस कोस कर दहाड़े मारकर रोता था। बड़ी किस्मत से फिर नीतीश कुमार जैसे बिहारी बेटे ने सेवा शुरू की। जिसका परिणाम आज का बिहार है। सीएम नीतीश कुमार के सतत सुशासनी सेवा भाव का ही परिणाम है कि आज बिहार राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा का द्योतक है। आज फिर से चुनाव के समय कुर्सी के लिए लार गिरा रहे भ्रष्टाचारी बाप- बेटे के इशारे पर के कुछ छुटभैया नेताओं के द्वारा जाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है, जो वर्तमान बिहार में नामुमकिन है। लोगों को सतर्क होना होगा,ऐसे राजनीतिक ठगों से।

भला आपने ऐसा कहीं देखा है कि खुद भ्रष्टाचार का मुकदमा झेल रहा एक बेटा जिसपर कानूनन 420 का मुकदमा दायर है वह घोटाले में राजद के जन्मसिद्ध अधिकार रहा है। अभी रोहतास में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी ने कहा कि जब लालू जी की सरकार थी तब गरीब “बाबू साहेब” के सामने सीना तान कर चलता था। बिहार की जनता तेजस्वी यादव  से पूछना चाहती है कि क्या गरीबी का कोई जात और धर्म होता है? तेजस्वी यादव जी लाख कोशिश कर ले अब जनता सामाजिक न्याय के साथ विकास के मूल मंत्र को समझ चुकी है। जनता को जाति के नाम पर बांटने की की नापाक कोशिश बन्द कीजिये। अपने छुटभैयों नेताओं को अनाप शनाप बोलने से मना कीजिये। जनता इन सब चीजों से ऊपर उठ चुकी है और विकास के नाम पर ही वोट करेगी। अब बिहार में जाति पूछकर पिटाई करनेवाली सरकार नहीं चाहिये।

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