पहली पसंद होने के बाद भी जयशंकर को मनमोहन नहीं बना पाए थे विदेश सचिव, मोदी ने सीधे बनाया विदेश मंत्री

पहली पसंद होने के बाद भी जयशंकर को मनमोहन नहीं बना पाए थे विदेश सचिव, मोदी ने सीधे बनाया विदेश मंत्री

NEWS4NATION DESK : मोदी कैबिनेट मंत्री विदेश मंत्री बनाए गए पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर की चर्चा खूब हो रही है। पीएम ने एस. जयशंकर को अपने पहले कार्यकाल में विदेश सचिव बनाया था।
 एस. जयशंकर जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक विदेश सचिव के तौर पर काम कर चुके हैं। इस बार सुषमा स्वराज सरकार में शामिल नहीं हुईं और जयशंकर को देश का नया विदेश मंत्री बना दिया गया। अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के बीच दोनों देशों में भारत के राजदूत रहे जयशंकर का कैबिनेट मंत्री बनाया जाना उन पर PM के भरोसे को भी जाहिर करता है।

पहली पंसद के बावजूद पूर्व पीएम मनमोहन सिंह जयशंकर को नहीं बना पाये थे विदेश सचिव

एस जयशंकर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के भी पसंदीदा रहे है। इस पूर्व आईएएस अधिकारी को मनमोहन सिंह अपने कार्यकाल में विदेश सचिव बनाना चाहते थे, लेकिन दबाव के चलते उनकी मंशा पूरी नहीं हो पाई थी। 

बात 2013 की है। केंद्र में UPA-2 की सरकार थी और नया विदेश सचिव चुना जाना था। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आईएफएस अधिकारी एस. जयशंकर को विदेश सचिव बनाना चाहते थे, लेकिन वरिष्ठता क्रम में सुजाता सिंह के ऊपर होने की वजह से उनकी मंशा अधूरी रह गई थी। 

हालांकि उस समय ऐसी खबरें भी आई थीं कि तत्कालीन UPA अध्यक्षसोनिया गांधी के दखल से भी जयशंकर को नजरअंदाज किया गया। 

गुरुवार को जयशंकर जब कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ले रहे थे, उस समय मंच के सामने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद थे। आज यही जयशंकर मोदी सरकार में विदेश मंत्री हैं।

आपको बता दें किमोदी सरकार 2.0की कैबिनेट में कई पुराने मंत्रियों को जगह मिली है और कुछ नए चेहरों को भी शामिल किया गया है। कैबिनेट मंत्री बनाए गए पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर की चर्चा खूब हो रही है। दरअसल, जयशंकर को प्रधानमंत्री की कैबिनेट में जगह मिलना एक चौंकाने वाला फैसला है। पीएम ने एस. जयशंकर को अपने पहले कार्यकाल में विदेश सचिव बनाया था।
 
 
 UPA-2 के कार्यकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 2013 में ही जयशंकर की क्षमताओं को देखते हुए उन्हें विदेश सचिव बनाना चाहते थे। उस समय सूत्रों के हवाले से ऐसा कहा गया था कि तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जयशंकर पर सुजाता सिंह को तवज्जो दी थी। कुछ लोगों का कहना है कि सुजाता के पिता और पूर्व IB चीफ टीवी राजेश्वर से गांधी परिवार की निकटता के चलते जयशंकर विदेश सचिव की रेस से बाहर हो गए थे।

बता दें एस जयशंकर अमेरिका के साथ परमाणु समझौता हो या चीन के साथ डोकलाम विवाद दोनों ही बड़े मामलों को जयशंकर ने बेहतर तरीके से सुलझाया था।

 

 

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