तीन तलाक के मुद्दे पर जदयू ने किया भाजपा का विरोध, कहा यह सामाजिक मुद्दा

तीन तलाक के मुद्दे पर जदयू ने किया भाजपा का विरोध, कहा यह सामाजिक मुद्दा

PATNA : तीन तलाक के मुद्दे को केन्द्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. अब वह नए सिरे संसद के बजट सत्र में इसे पेश करने की तैयारी में है. लेकिन इस मुद्दे पर एनडीए में शामिल जेडीयू भाजपा से अलग राय रखती है. जदयू नेता श्याम रजक ने कहा इस मुद्दे को लेकर उनकी पार्टी केंद्र सरकार के साथ नहीं है. बजट सत्र में जो भी नया विधेयक लाया जायेगा. उसमें जदयू भारतीय जनता पार्टी का साथ नहीं देगी.

श्याम रजक ने कहा है की तीन तलाक का मुद्दा समाज का मुद्दा है और इसे समाज के द्वारा ही तय किया जाना चाहिए. बिहार सरकार में मंत्री के तौर पर काम करनेवाले श्याम रजक ने कहा की उनकी पार्टी ने पहले भी तीन तलाक विधेयक का विरोध किया था. उन्होंने कहा आगे भी इस विधेयक का विरोध किया जायेगा. श्याम रजक ने कहा है की उनकी पार्टी के विरोध के कारण ही तीन तलाक का विधेयक राज्यसभा में नहीं आ पाया था. श्याम रजक की पार्टी जदयू ने भी उनके बयान का समर्थन किया है. 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला 

बतात्ते चले की मुस्लिम महिलाओं के हितों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम् फैसला दिया था. कोर्ट की ओर से केंद्र सरकार को अगले छः माह में कानून बनाने का निर्देश दिया गया था. कानून बनने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर पूरी तरह रोक लगा दिया था. उच्चतम न्यायालय की ओर से यह भी कहा गया था की केंद्र जो भी कानून बनाएगा, उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून का ख्याल रखा जायेगा. 

क्या है तीन तलाक 

तीन तलाक को तलाक ए बिदअत कहा जाता है. बिदअत का मतलब है की वह कार्य जो इस्लाम का मूल अंग समझकर किया जाता है. इसका मतलब यह है की जब कुरान या हदीस से कोई बात साबित नहीं होती है. इसके बाद भी उसे इस्लाम का अंग समझ कर किया जाता है. उसे बिदअत कहते हैं. तीन तलाक को भी तलाक ए बिदअत कहा जाता है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी यह कहा गया है की तीन तलाक का जिक्र न ही कुरान में आया है और न ही हदीस में.  

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