जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रशांत किशोर ने कुर्सी के खेल में कैसे मारी बाजी,पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रशांत किशोर ने कुर्सी के खेल में कैसे मारी बाजी,पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

PATNA: कहा जाता है कि राजनीति में कुर्सी की भूमिका अहम होती है।आपके पास कद वाली कुर्सी है तो ठीक नहीं तो आप अपनी औकात को कायदे से कमतर समझ लीजिए। जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कुर्सी के खेल को जरा समझिए। कैसे तीन महीने से सिरे से गायब और तरह-तरह की अटकलों के बीच पहुंचे प्रशांत किशोर ने कुर्सी के खेल में बाजी मार ली। जरा गौर देखिए इन कुर्सियों को ,कुर्सी नंबर एक पर तो स्वयं सीएम नीतीश बैठे हैं ,लेकिन ठीक दाहिने प्रशांत किशोर । पीके का नीतीश कुमार के ठीक दाहिने यानि कुर्सी नंबर-2 पर बैठना क्या यह साबित नहीं करता है कि जदयू में पीके का कद फिलहाल कम नहीं हुआ है...यही तो कुर्सी का खेल है।

लगभग तीन महीनें से जदयू के सक्रिय राजनीति से गायब प्रशांत किशोर का आज प्रकट होना और वो भी सीधे कुर्सी नंबर दो पर ,मतलब समझ लीजिए कि मीडिया से लेकर उनके दल में चल रहे अटकलों की पूरी तरह से हवा निकल गयी।

जेडीयू कार्यकारिणी की बैठक में राष्ट्रीय अद्यक्ष की हैसियत से नीतीश कुमार कुर्सी नंबर -1 पर विराजमान थे। वहीं नीतीश के ठीक दाहिने कुर्सी नंबर-2 पर प्रशांत किशोर राष्ट्रीय कार्यकारिणी में आए लोगों को अपनी हैसियत बता रहे थे।जबकि सीएम के बायीं ओर यानि कुर्सी नंबर-3 पर वशिष्ठ नारायण सिंह बैठे थे।जबकि आरसीपी सिंह जो राष्ट्रीय महासचिव हैं उन्हें वशिष्ठ नारायण के बाद वाली कुर्सी पर जगह मिली थी।वहीं प्रशांत किशोर की कुर्सी के बाद वाली कुर्सी पर एक दूसरे राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी बैठे थे।

तो यह थी आज के जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कुर्सी का किस्सा।मतलब समझ लीजिए कुर्सी सिर्फ एक आसन नहीं है,राजनीति में यह प्रभाव रूतबा और रूआब का प्रतीक है।तो कुर्सी नंबर -2 को मतलब पाठक भी समझ लें ,प्रशांत किशोर कुर्सी नंबर -2 पर आकर खुद से बैठे नहीं होंगे बल्कि उसमें सुप्रीमो की सहमति जरूर होगी।

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