'शहरों को कर्बला बनाने' के बयान पर जदयू एमएलसी बलियावी ने नहीं मांगी माफी ... भाजपा की मांग ऐसे नेता को पागलखाने भेजें सीएम नीतीश

'शहरों को कर्बला बनाने' के बयान पर जदयू एमएलसी बलियावी ने नहीं मांगी माफी ...  भाजपा की मांग ऐसे नेता को पागलखाने भेजें सीएम नीतीश

पटना. ‘कानून की चाहे जितनी मोटी किताबें बनवा लो मेरा कानून मेरा रसूल है’, यह कहना है जदयू एमएलसी गुलाम रसूल बलियावी का जिन्होंने हजारीगबाग में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ बयान बाज़ी की है. उन्होंने भाजपा से निष्कासित नेता नुपुर शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि मुझे जितनी गालियां देनीं हों दे दो लेकिन मेरे आका की इज्जत पर हाथ डालोगे तो अभी तो हम कर्बला मैदान में इकट्ठा हुए हैं, उनकी इज्जत के लिए हम शहरों को भी कर्बला बना देंगे. बलियावी के इस विवादित बयान पर भाजपा ने आपत्ति जताई है. भाजपा प्रवक्ता डॉ रामसागर ने शुक्रवार को कहा कि बलियावी की जगह राजनीति में नहीं बल्कि मानसिक आरोग्यशाला में है. 

उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बलियावी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. रामसागर ने कहा कि नीतीश कुमार को अपने बड़बोले नेता को या तो बिहार के कोइलवर या झारखंड के कांके या उत्तर प्रदेश के आगरा में भर्ती कराना चाहिए. बलियावी के बयान की निंदा करते हुए रामसागर ने कहा कि एक ओर मुसलमान खुद मानते हैं कि दुनिया में मुसलमानों के लिए सबसे सुरक्षित जगह हिंदुस्तान है. दूसरी ओर बलियावी जैसे नेता मुस्लिमों को भड़काने का काम करते हैं. ऐसे नेता पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए. 

दरअसल, बलियावी ने नामूसे रिसालत पर कानून बनाने की मांग की थी. दलितों की तरह मुसलमानों की सुरक्षा के लिए सेफ्टी एक्ट बनना चाहिए. सत्ता में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा था कि मेरी ज़िंदगी मेरी नहीं है, मेरी सांसे मेरी नहीं हैं, जीने की तमन्ना वो करे जिसके पास रसूल का नूर ना हो. हम तो इसी आरजू तमन्ना से जिए जीते हैं कि मरने के बाद एक दिन ऐसा भी आएगा कोई नहीं रहेगा. मैं रहूंगा मेरा रसूल रहेगा, कोई समझौता नहीं होगा. लेकिन, सेकुलर कहलाने वाले किसी पार्टी के नेता ने आवाज़ नहीं उठाई कि इस औरत को गिरफ्तार करो. इस पागल औरत को पकड़ो कोई आवाज़ नहीं उठी.”

बलियावी की सफाई : वहीं विवादों से घिरने के बाद बलियावी ने शुक्रवार को कहा कि मैं इस बात को मानता हूँ कि मैंने कहा है कि कर्बला बना देंगे. लेकिन कर्बला का मतलब समझना चाहिए. हम हुसैन वाले हैं यजीद वाले नहीं है. हम सब लूटा देंगे लेकिन मानवता और इंसानियत को नहीं लुटने देंगे. आदमियत की इज्जत और प्रतिष्ठा पर दाग लगने नहीं देंगे. भाईचारे की दीवार दरकने नहीं देंगे. यही कर्बला है. इसका गलत अर्थ निकाला जा रहा है.


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