भाजपा पर जदयू का पलटवार, कहा- BJP नेताओं को जेपी के विचारों को पढ़ने की आवश्यकता

भाजपा पर जदयू का पलटवार, कहा- BJP नेताओं को जेपी के विचारों को पढ़ने की आवश्यकता

पटना. भाजपा सांसद सुशील मोदी के बयान पर जदयू प्रवक्ता अरविंद निषाद ने पलटवार किया है। अरविंद निषाद ने सुशील मोदी के लोकनायक जयप्रकाश नारायण पर दिये गये बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुशील मोदी गृहमंत्री अमित शाह को खुश कर उनकी नजरों में अपनी स्थिति ठीक करना चाहते हैं। सुशील मोदी के पूरे बयान में उनकी व्याकुलता एवं घबराहट को दर्शाता है।

निषाद ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के जेपी की जन्मभूमि सिताबदियारा के कार्यक्रम से भाजपा लोकनायक जयप्रकाश जी का नाम लेकर राजनीतिक रूप से लाभ लेना चाहती है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को विमल प्रसाद द्वारा संकलित 10 खंडों में प्रकाशित जेपी के विचारों को पढ़ने की आवश्यकता है। 

उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति आंदोलन में जनसंघ और हिंदू महासभा को आंदोलन का हिस्सा तो बनाया, लेकिन जनसंघ और हिंदू महासभा के सांप्रदायिक और विभाजनकारी कुकृत्य के कारण उनकी मंशा पर संदेह जताया था। जनसंघ और जनता पार्टी में विलय के पश्चात जेपी ने जनसंघ के नेताओं को आरएसएस से अलग करने के कई प्रयास किये। 1977 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी की जीत के बाद जेपी ने चंद्रशेखर को पूर्ण बहुमत से पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया और साथ ही उन्होंने जनसंघ का जनता पार्टी में पूर्ण विलय करवाने और खासकर आरएसएस और जनसंघ की दोहरी सदस्यता को 6 माह के अंदर समाप्त करने की दिशा में अधिकार दिया। बाद में जनता पार्टी के सदस्यों ने आरएसएस की दैनिक क्रियाकलापों में भाग लेने का निर्णय लिया। 

उन्होंने कहा कि जनसंघ के सदस्यों को जनता पार्टी की सदस्यता फार्म भरने के लिए बाध्य किया गया, जिसमें लिखा था मैं महात्मा गांधी जी द्वारा दिये गये सभी मूल्यों एवं आदर्शों में विश्वास रखते हुए स्वयं को समाजवादी राज्य की स्थापना के लिए अर्पित करता हूं। परंतु बाद में जनसंघ ने आरएसएस की सदस्यता को छोड़ने से इंकार कर दिया। इससे यह साफ जाहिर होता है कि जनसंघ ने ना केवल जेपी का अपमान कर उनके पीठ में खंजर मारा, बल्कि जनसंघ के सदस्यों ने संपूर्ण क्रांति को ही खत्म करने का काम किया।

वर्ष 1977 में जनता पार्टी सरकार के बनने के बाद जेपी जनसंघ और आरएसएस के कार्यकर्ताओं के दंगों में संलिप्तता को लेकर पैनी नजर रखे हुए थे। उनके खिलाफ शिकायत भी कर रहे थे। जब जेपी पटना में मृत्यु से जूझ रहे थे, तभी 1 मार्च 1979 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को लिखे पत्र में जेपी ने लिखा की संप्रदायिकता का दानव फिर से अपना सर उठा रहा है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के पद चिन्हों पर चलने का काम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर रहे हैं। नीतीश कुमार के पास जेपी आंदोलन के समय से ही भाजपा और आरएसएस के हिडेन एजेंडा और कार्यप्रणाली का पर्याप्त अनुभव है।


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