तेजस्वी पर JDU का हर तीर बेअसर ! अब 'नीतीश' के पास क्या है चारा ? डिप्टी CM ने 'चंद्रशेखर' का ही दिया साथ तो और बिगड़ी बात

तेजस्वी पर JDU का हर तीर बेअसर ! अब 'नीतीश' के पास क्या है चारा ? डिप्टी CM ने 'चंद्रशेखर' का ही दिया साथ तो और बिगड़ी बात

PATNA: बिहार की सत्ताधारी जेडीयू और राजद के बीच तल्खी लगातार बढ़ते जा रही है। सीएम नीतीश के खिलाफ राजद विधायक सुधाकर सिंह की आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद दोनों दल के नेता आमने-सामने हैं. मुख्यमंत्री को हिजडा और भीखमंगा कहे जाने के बाद जेडीयू ने गहरी आपत्ति दर्ज की। पार्टी के वरिष्ठ नेता उपेन्द्र कुशवाहा ने सबसे पहले सुधाकर सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर राजद पर दबाव बढ़ाया. सीएम नीतीश और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी इशारों ही इशारों में राजद नेतृत्व से अपने विधायक पर एक्शन लेने को कहा. सुधाकर के बाद शिक्षा मंत्री चंद्रशेखऱ का रामचरितमानस पर आपत्तिजनक बयान आ गया. जेडीयू नेतृत्व ने इस पर भी आपत्ति दर्ज की और तेजस्वी यादव से कार्रवाई करने को कहा. एक तरफ जहां नीतीश कुमार की पार्टी राजद कोटे के मंत्री व विधायक पर कार्रवाई करने का दवाब बना रही, दूसरी तरफ तेजस्वी यादव ने यह कहकर जेडीयू को खुली चुनौती दे दी है कि संविधान में सबको बोलने की आजादी है। ऐसे में अब जेडीयू का अगला कदम क्या होगा ? नीतीश कुमार की पार्टी की तरफ से राजद के दो बड़बोले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर तरकश के सारे तीर चल दिए, इसके बाद भी राजद नेतृत्व पर कोई असर नहीं हो रहा। ऐसे में अब नीतीश कुमार क्या करेंगे ? 

 तेजस्वी ने जेडीयू की मांग खारिज कर चंद्रशेखऱ का दिया साथ 

रविवार शाम दिल्ली से पटना लौटे तेजस्वी यादव ने यह कहकर राजद-जेडीयू में विवाद और गहरा दिया कि संविधान में सबको बोलने की आजादी है। तेजस्वी यादव अपने शिक्षा मंत्री चंद्रशेखऱ के उस बयान पर साथ देते दिखे, जिसमें उन्होंने रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताया था. तेजस्वी यादव ने शिक्षा मंत्री के बयान पर कहा कि संविधान हमें बोलने की आजादी देता है, महंगाई और बेरोजगारी की बात कोई क्यों नहीं करता?  ये सब बीजेपी की सोची समझी राजनीतिक साजिश है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कभी उपराष्ट्रपति, कभी राज्यपाल, कभी केंद्रीय मंत्री बनाने की अफवाह फैलाई जा रही थी. इन्हीं लोगों द्वारा कभी जेडीयू को तोड़ने की साज़िश रची जा रही थी. यह सब बीजेपी समर्थित मीडिया और बीजेपी माइंडेड लोग कर रहे थे. महागठबंधन टूटने का सवाल ही पैदा नहीं होता है.तेजस्वी ने कहा है कि हम सबों को सभी जाति-धर्मों और ग्रंथों का सम्मान करना चाहिए. ग्रंथों और धर्म की बजाय वास्तविक मुद्दों पर बहस होनी चाहिए. धर्म को राजनीति से दूर रखना चाहिए तभी हम जनता के असल मुद्दों पर बात कर पायेंगे. मंदिर -मस्जिद, हिंदू-मुस्लिम ये सब बीजेपी और बीजेपी समर्थित मीडिया के मुद्दे हैं. चर्चा रोजी-रोटी, शिक्षा-चिकित्सा, विकास और जनकल्याण पर होनी चाहिए. धर्म और ग्रंथ पर नहीं होनी चाहिए. इतना ही नहीं तेजस्वी यादव ने बिना नाम लिये जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में महागठबंधन के शीर्ष नेता हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय लालू प्रसाद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं. सब जानते हैं कि जनता किसके साथ है. बिहार की जनता नीतीश कुमार और लालू प्रसाद के साथ है ना की बयानवीर चर्चित नेताओं के साथ है. इस तरह से उन्होंने उपेन्द्र कुशवाहा, अशोक चौधरी और ललन सिंह के प्रेशर को पूरी तरह से खारिज कर दिया. 

कुशवाहा का खुलासा-बीजेपी और तेजस्वी में गुप्त समझौता 

दरअसल, उपेन्द्र कुशवाहा लगातार राजद नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं. जेडीयू की तरफ से सुधाकर सिंह और मंत्री चंद्रशेखऱ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है. इसके बाद भी राजद नेतृत्व कार्रवाई के नाम पर चुप है. दो दिन पहले उपेन्द्र कुशवाहा ने तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी. उन्होंने कहा था कि सब लोगों को मालूम है कि बीजेपी को फायदा पहुंचाने का काम राजद के लोग लगातार कर रहे हैं . यह जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहे, चुप हैं.यह सीधे तौर पर गलत है. लोगों के मन में जो आशंका है कि किसी न किसी रूप में भारतीय जनता पार्टी के दबाव में राष्ट्रीय जनता दल के लोग काम कर रहे हैं. कुछ और मामलों में राजद के शीर्ष नेतृत्व(लालू-तेजस्वी) को केंद्र सरकार से मदद मिल जाए, ऐसी आशंकाओं को बल मिल रहा है. ऐसे में जितनी जल्दी हो सके सुधाकर सिंह और चंद्रशेखर पर कार्रवाई हो, ताकि ऐसी आशंकाएं खारिज हो सके. इतना कुछ होने के बाद भी बीजेपी को मदद पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है, तब तो लोगों के मन में जो आशंका है कि राजद का नेतृत्व यह चाहता है कि केंद्र सरकार से उनको कई मामलों में मदद मिले. उसके एवज में बीजेपी के लोग फायदा पहुंचा रहे हैं.

ललन सिंह का बयान भी राजद नेतृत्व पर नहीं बना सका दबाव

वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी रविवार को कहा था कि जेडीयू का स्पष्ट मानना है कि हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं. सभी धर्म को मानने वाले लोगों का सम्मान करते हैं. इसके साथ ही सभी धर्म ग्रंथों का भी सम्मान करते हैं. इसलिए इस पर कुछ भी कहना सही नहीं होगा. शिक्षा मंत्री के बयान को लेकर आरजेडी के नेतृत्व को ही निर्णय लेना है. राष्ट्रीय जनता दल का नेतृत्व सक्षम है. वो ही इस पर निर्णय लेगा. हमारा स्टैंड स्पष्ट है कि हम सभी का सम्मान करते हैं. कुल मिलाकर नीतीश कुमार के बाद ललन सिंह के बाद जेडीयू के दूसरे बड़े नेता इस बयान पर आरजेडी के साथ नहीं हैं. 

जेडीयू के इन बड़े नेताओं के बयान से स्पष्ट है कि सुधाकर सिंह और चंद्रशेखऱ पर कार्रवाई को लेकर सहयोगी राजद नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा. इसके बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं होना, उल्टे शिक्षा मंत्री का अपरोक्ष तौर पर पक्ष लेना यह साबित करता है कि तेजस्वी यादव जेडीयू के दबाव में झुकने वाले नहीं। ऐसे में जेडीयू का अगला स्टैंड क्या होगा...इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं. 

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