जीत के बाद कम नहीं होगी 27 विधायकों की मुश्किलें, नए साल में छीन सकती है MLA की कुर्सी

जीत के बाद कम नहीं होगी 27 विधायकों की मुश्किलें, नए साल में छीन सकती है MLA की कुर्सी

PATNA.  बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, जिनमें कुछ सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम था। अब इन कम मार्जिन से जीत दर्ज करनेवाले विधायकों की परेशानी बढ़ने वाली है। पराजित प्रतिद्वंद्वियों ने पटना हाईकोर्ट में दस्तक दी है। केस फाइल हो गया है। मुख्य न्यायाधीश के सामने प्रस्तुति और लिस्टिंग भी हो चुकी है। चार जनवरी को अदालत खुलने के बाद सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। संभव है कि नए साल में कुछ को अपनी एमएलए की कुर्सी गंवानी पड़ सकती है

नियमों के मुताबिक नतीजे आने के बाद से 45 दिनों के भीतर कोई भी प्रत्याशी परिणाम को चुनौती दे सकता है। हारे हुए 29 प्रत्याशियों ने मतगणना में गड़बड़ी एवं अन्य आरोपों में 27 विधायकों के खिलाफ 24 दिसंबर तक अलग-अलग तारीखों में मुकदमा दर्ज कराया है। इनमें विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के भी प्रत्याशी हैं। मात्र 12 वोटों से हार जाने वाले राजद के पूर्व विधायक शक्ति सिंह यादव ने तो पहले ही निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दे रखी है।  


महागठबंधन से 14 प्रत्याशियों ने किया है केस

अपनी हार के बाद  मुकदमा दर्ज कराने वालों में सबसे ज्यादा आठ राजद और छह कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। पांच निर्दलीयों को भी प्रतिद्वंद्वियों की जीत पर आपत्ति है। सत्ता पक्ष के भी पांच प्रत्याशियों ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाए हैं। इनमें तीन जदयू और दो भाजपा के हैं। माकपा और बसपा के भी एक-एक प्रत्याशी हैं। दो ने सीधे चुनाव आयोग को ही पार्टी बनाया है। एक मामला विधान परिषद का है। टिकारी के कांग्रेस प्रत्याशी सुमंत कुमार का आरोप है कि रिटर्निंग अफसरों ने पक्षपात करके जीतने के बाद भी हारा हुआ घोषित कर दिया है। जिन विधायकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, उनमें सबसे ज्यादा नौ जदयू के हैं, जबकि भाजपा के छह हैं। राजद के भी सात विधायक हैं, जिन्हें हारे हुए प्रत्याशियों ने निशाने पर रखा है। कांग्रेस, माले, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और लोजपा के एक-एक विधायक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ है।  


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