जेल से फरार होने के फिराक में है झारखण्ड का डॉन, उम्रकैद की सजा बरकार

जेल से फरार होने के फिराक में है झारखण्ड का डॉन, उम्रकैद की सजा बरकार

NEWS4NATION DESK :   कभी सात लाख रुपए का इनामी अपराधी डॉन अखिलेश सिंह एक बार फिर से जेल से फरार होने के फिराक में है। मूल रुप से बिहार का निवासी झारखंड के इस खतरनाक गैंगस्टर द्वारा जेलर उमाशंकर पांडेय की जेल परिसर में हत्या के आरोप में निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी जिस सजा को गुरुवार को रांची हाइकोर्ट ने भी बहाल रखा और उसपर किसी तरह का रहम नहीं बरतने का आदेश सुनाया।   

जज, पुलिस, बिजनेसमैन हो या गैंगस्टर समाज का हर तबका इस वांटेड अपराधी के आतंक में जीता रहा है। अखिलेश 50 से अधिक मामलों में वांटेड था और अभी भी अदालतों में इसके खिलाफ 36 मामले लंबित हैं। अखिलेश सिंह के आतंक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को उसने खामोश कर दिया। 

बताया जाता है कि आज तक जिसने भी अखिलेश के खिलाफ आवाज उठाई, उस पर गोली चलाई गई या फिर उसकी हत्या कर दी गई। अखिलेश ने पुलिस अधिकारी, जज, जेलर, व्यवसायी, यहां तक कि दूसरे गुट के अपराधियों को भी नहीं बख्शा। 

एक नजर अखिलेश के आपराधिक इतिहास पर 

जेलर की हत्या कर डाली बिजनेसमैन ओम प्रकाश काबरा के अपहरण काण्ड में अखिलेश सिंह पहली बार जमशेदपुर के घाघीडीह जेल गया था। 12 फरवरी 2002 को उसने जेलर उमाशंकर पांडेय की जेल के अंदर ही हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि जेलर ने अखिलेश को जेल में बांध कर जम कर पीटा था और कई कई दिनों तक बेड़ियों से भी बांध रखा था। कुछ दिन तक खामोश रहने का बाद अखिलेश जेल से फरार हो गया और 15 दिन बाद दोबारा जेल कैंपस में स्थित जेलर के घर पंहुचकर जेलर उमाशंकर की गोली मार कर हत्या कर दी। 

जज ने सुनाई सजा तोजज पर चलाई गोली जेलर

उमाशंकर पांडेय मर्डर केस में जज आर पी रवि ने अखिलेश को उम्रकैद की सुनाई थी। सजा सुनने के बाद अखिलेश ने 19 मार्च 2008 को जज के घर में घुस कर उनपर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। हालांकि, इस हमले में जज आर पी रवि बाल-बाल बच गए थे, लेकिन इस घटना के बाद जमशेदपुर में अखिलेश को आतंक का दूसरा पर्याय माने जाने लगा। 

कंप्लेन करने वाले कारोबारी को दिनदहाड़े मारी गोली 

ओम प्रकाश काबरा के अपहरण काण्ड में पहली बार जेल जाने वाले अखिलेश ने अपने खिलाफ गवाही देने के कारण काबरा को अपने सबसे भरोसेमंद शूटर रंजीत चौधरी के साथ मिलकर साकची स्थित कार्यालय पंहुचा में दिनदहाड़े गोली मार कर हत्या कर दी। बता दें कि हत्या के दिन जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में भारत-इंग्लैंड के बीच एकदिवसीय मैच हो रहा था और तत्कालीन सीएम बाबूलाल मरांडी समेत अंतर्राष्ट्रीय मेहमानों के शहर में होने के कारण पुलिस महकमा कीनन स्टेडियम की सुरक्षा में तैनात था। 

गैंगस्टर परमजीत की जेल में करवाई हत्या 

जमशेदपुर के ही कुख्यात अपराधी परमजीत सिंह को अखिलेश के वर्चस्व को चुनौती देना महंगा पड़ा और दोनों बीच छिड़े गैंगवार में अखिलेश और परमजीत दोनों के कई शूटर मारे गए। अखिलेश और परमजीत की गिरफ्तारी के बाद दोनों को घाघीडीह जेल में रखा गया था। इसी बीच अखिलेश ने जेल में ही परमजीत की हत्या कर डाली। बताया जाता है कि परमजीत की हत्या के लिए अखिलेश ने अपने अपने भरोसेमंद गुर्गे कपाली को जेल में ही पिस्टल उपलब्ध करवाया था। 

अखिलेश सिंह पर कुल 52 केस दर्ज हैं। इनमें से अदालत में 36 मामले लंबित हैं। जेलर उमाशंकर पांडेय और दरोगा अरविंद सिंह मामले में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। हालांकि, कई मामलों में गवाह नहीं मिलने कारण वह बरी भी हो गया है। 

बता दें कि वर्ष 2016 में झारखण्ड हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अखिलेश फरार हो गया और एक बार फिर उसने ट्रांसपोर्ट उपेंद्र सिंह की जमशेदपुर कोर्ट में गवाही के दौरान हत्या करवा दी। आपको बता दें कि अखिलेश के पिता चंद्रगुप्त सिंह पर भी जमशेदपुर में गोलियां चलाई थी और जिसमे वह बाल बाल बच गए थे। अखिलेश इस घटना का बदला लेने के लिए बुरी तरह बेचैन था लेकिन उससे पहले ही झारखंड पुलिस और हरियाणा पुलिस ने मुठभेड़ में उसको उसकी पत्नी गरिमा सिंह के साथ गुरुग्राम के एक रेस्ट हाऊस से धर दबोचा, इस मुठभेड़ के दौरान अखिलेश के पैर में गोली भी लगी थी। 

बिहार और झारखंड में कई वारदातों को अंजाम देने वाले अखिलेश सिंह की संपत्ति 200 करोड़ से अधिक की है। रांची ईडी ने दो वर्ष पूर्व अखिलेश सिंह और उसकी पत्नी की 2.95 करोड़ की संपत्ति को अटैच भी किया है। 

गौरतलब है की बीते वर्ष तब औरंगाबाद जेल में बंद अखिलेश सिंह के इशारे पर बिहार के बाहर के एक व्यवसायी का अपहरण कर उससे 50 लाख की फिरौती मांगी थी। उक्त व्यवसायी के परिजनों को फिरौती की रकम सासाराम व कु़दरा के बीच ट्रेन से गिरान को कहा गया था जिसकी भनक पुलिस को थी। अखिलेश के दो सहयोगी ट्रेन से एक बैग में रखकार गिराए गए उस रकम को उठाने के बाद बाईक से साराम की ओर चल दिए पर पुलिस ने पीछा कर दोनों को सासाराम के पास स्थित टॉल टैक्स पर गिरफ्तार कर लिया।  बाद में उस व्यवसायी को मुजफ्फरपुर से मुक्त करा लिया गया।

विनायक विजेता की रिपोर्ट

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