तेजस्वी यादव की CM उम्मीदवारी पर भी 'मांझी' ने उठाये थे सवाल, इन 5 वजहों से महागठबंधन छोड़ JDU से मिलाया हाथ

तेजस्वी यादव की CM उम्मीदवारी पर भी 'मांझी' ने उठाये थे सवाल, इन 5 वजहों से महागठबंधन छोड़ JDU से मिलाया हाथ

पटनाः बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतनराम मांझी एक बार फिर से पलटी मार दी. मांझी पहले एनडीए फिर महागठबंधन और अब एब बार फिर एनडीए में शामिल हो रहे हैं। मांझी महागठबंधन में पर्याप्त पूछ-परख न होने की वजह से नाराज चल रहे थे। मांझी महागठबंधन में फैसला लेने के लिए समन्वय समिति के गठन की मांग कर रहे थे। लेकिन उनकी मांग को सिरे से खारिज किया जा रहा था।

तेजस्वी की सीएम उम्मीदवारी पर भी उठाया था सवाल

मांझी की महागठबंधन छोड़ने की कई वजहें थी।मांझी मांग कर रहे थे कि विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले यह तय हो जाए कि किस पार्टी को कितनी सीट मिलेगी, लेकिन राजद की ओर से पहल नहीं हुई। विधानसभा चुनाव में अधिक सीट पाने के लिए मांझी प्रेशर पॉलिटिक्स कर रहे थे, उन्होंने कई बार महागठबंधन की ओर से तेजस्वी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होने पर भी सवाल उठाया था।


श्याम रजक के राजद में शामिल होने से भी थे परेशान

जदयू से दलित नेता श्याम रजक के राजद में आ जाने से मांझी को महागठबंधन में खुद के दलित नेता के रूप में कम महत्व मिलने की आशंका होने लगी थी। दूसरी ओर जदयू से दलित नेता के चले जाने और लोजपा नेता चिराग पासवान के विरोधी रूख से मांझी को एनडीए में दलित नेता के रूप में अधिक जगह मिलने की उम्मीद दिखी। महागठबंधन में जाने के बाद मांझी की पार्टी लगातार कमजोर हो रही थी। नीतीश मिश्रा, वृषिण पटेल, महाचंद्र सिंह, भीम सिंह और नरेंद्र सिंह जैसे कद्दावर नेताओं ने पार्टी छोड़ दी।ऐसे में पार्टी में कोई बड़ा चेहरा नहीं बचा था। ऐसे में खुद को ही पॉलिटकली जीवित रखना बड़ा मुश्किल हो रहा था। तेजस्वी यादव  पूर्व सीएम जीतन राम मांझी को एक दम भाव नहीं दे रहे थे।यहां तक तक फोन पर भी बात नहीं करते थे।जीतन राम मांझी ने समझ लिया कि अगर निर्णय नहीं लेंगे तो चुनाव में हमारी पार्टी कहीं की नहीं रहेगी।खुद की सीट बचाना भी मुश्किल हो जाएगा ऐसे में उन्होंने यू टर्न लेते हुए नीतीश कुमार से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी।


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