नियुक्ति वाली नौटंकी ! नीतीश-तेजस्वी का 'नौजवानों-बेरोजगारों' के साथ धोखा, महीने भर पहले पुलिसवालों की हुई ज्वाइनिंग, अब चेहरा चमकाने को फिर से देंगे नियुक्ति पत्र

नियुक्ति वाली नौटंकी ! नीतीश-तेजस्वी का 'नौजवानों-बेरोजगारों' के साथ धोखा, महीने भर पहले पुलिसवालों की हुई ज्वाइनिंग, अब चेहरा चमकाने को फिर से देंगे नियुक्ति पत्र

PATNA:  बिहार में इन दिनों नौकरी पॉलिटिक्स जारी है। नई सरकार के गठन के बाद पुरानी नियुक्तियों को नई बताकर नियुक्ति पत्र वितरित किये जा रहे हैं. अधिकांश विभागों में नियुक्ति पत्र बांटने की होड़ मची हुई है। सीएम नीतीश और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव दावा कर रहे कि तीन महीने में ही हजारों लोगों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है।  बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिन लोगों की नियुक्ति हो चुकी और वे काम कर रहे, उनका फिर से नियुक्ति पत्र बांटने से क्या फायदा, क्या सीएम नीतीश और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव बिहार के लोगों, पढ़े-लिखे नौजवानों और बेरोजगारों को बेवकूफ समझ रहे? क्या बिहार के लोग यह नहीं जान-समझ रहे कि तीन महीने में नौकरी नहीं दी जा सकती? जिन लोगों के बीच सरकार फिर से नियुक्ति पत्र बांट रही है वे भी सरकार पर तंज कस रहे. अपना चेहरा चमकाने को लेकर बिहार का सरकारी खजाना खोल दिया गया है। एक बार फिर से हम आपको सबूत दिखा रहे हैं.  

बिहार के पढ़े-लिखे लोगों के साथ धोखा

बिहार के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री इन दिनों नौकरी बांट रहे हैं. जब से नीतीश कुमार भाजपा से दामन छोड़ाकर तेजस्वी यादव से हाथ मिलाया,तभी से नौकरी बांटने का सिलसिला जारी है। हद तो तब गई जब सेवा दे रहे सरकारी सेवकों को फिर से ज्वाइनिंग लेटर थमाया जा रहा। सरकार ने चेहरा चमकाने और बिहार के पढ़े-लिखे बेरोजगारों को बेवकूफ बनाने के लिए सरकारी खजाना खोल दिया है। नियुक्ति पत्र बांटने को लेकर सरकार की तरफ से बड़े-बड़े कार्यक्रम किये जा रहे है. लंबी-लंबी बातें की जा रहीं और दावा किया जा रहा कि नई महागठबंधन की सरकार बनते ही नौकरी की बाढ़ आ गई। 


डीआईजी-एसपी ने पिछले महीने ही दी थी नियुक्ति पत्र 

राजधानी के गांधी मैदान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव 16 नवंबर को 10 हजार 459 पुलिसकर्मियों को नियुक्ति पत्र देंगे। इनमें 8246 सिपाही और 2213 अवर निरीक्षक शामिल हैं।नौकरी देना अच्छी बात, लेकिन नौकरी के नाम पर जनता को बेवकूफ बनाना धोखा है. जिन पुलिसकर्मियों को नीतीश-तेजस्वी 16 तारीख को ज्वाइनिंग देने वाले हैं, उन सभी को पहले ही ज्वाइनिंग लेटर दिया जा चुका है.इतना ही नहीं वे सभी ट्रेनिंग ले रहे हैं. दारोगा को क्षेत्रीय डीआईजी और आईजी ने एक महीने पहले ही नियुक्ति पत्र दे दिया। वहीं सिपाही का जिले के एसपी की तरफ से ज्वाइनिंग लेटर दिया गया. उदाहरण के तौर पर हम आपको बता रहे हैं. कोशी रेंज के डीआईजी शिवदीप लांडे ने पुलिस मुख्यालय के आदेश पर 17 अक्टूबर को सहरसा स्थित कार्यालय में 60 नवनियुक्त सब इंस्पेक्टर को नियुक्ति पत्र दिया था। बतातें चलें कि कोशी रेंज के सहरसा ,सुपौल,मधेपुरा जिलों के लिए कुल 61 लोग दरोगा में चयनित हुए थे. जिसमें एक दरोगा का मामला कोर्ट में रहने के कारण उनको नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया था। उक्त दरोगा की नियुक्ति के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा गया . डीआईजी शिवदीप लांडे ने सारी औपचारिकता पूरी करने के बाद सभी को नियुक्ति पत्र दिया था। इसके अलावे अन्य डीआईजी की तरफ से भी दारोगा को नियुक्ति पत्र वितरित किये गये थे। 

पुलिस मुख्यालय अपने ही आदेश से पलट रहा 

साहब...आपके ही अधिकारियों ने नियुक्ति पत्र दे दिया। इसके बाद फिर से नियुक्ति पत्र देने का क्या मतलब? आखिर मकसद तो यही है न कि सरकार के पैसे से खुद का चेहरा चमके। नीतीश-तेजस्वी 16 तारीख को 10 हजार पुलिसकर्मियों को नियुक्ति पत्र बांटने वाले हैं. सरकार का चेहरा चमके इशको लेकर पुलिस मुख्यालय पुरी कवायद में जुटा है। डीजीपी ने पूरे लाव-लश्कर के साथ नियुक्ति स्थल गांधी मैदान का जायजा लिया। एडीजी हेडक्वाटर्र  जे.एस. गंगवार ने बताया कि 10000 से ऊपर पुलिस पदाधिकारी और कर्मियों को नियुक्ति पत्र दिए जायेंगे। उन्होंने बताया कि पदाधिकारी में सब इंस्पेक्टर और सार्जेंट. जिलों में रिजल्ट आने के बाद इनकी नियुक्ति के लिए योगदान देने के लिए समय निर्धारित किया गया. उस समय सीमा में इन लोगों ने योगदान दिया, मेडिकल कराया गया. सारी प्रक्रिया होती है. एडीजी से पूछा गया कि जिन लोगों को 16 तारीख को नियुक्ति पत्र दिये जायेंगे उनसभी को डीआईजी और एसपी ने नियुक्ति पत्र दे दिये हैं तो फिर से क्यों दिया जा रहा ? तब एडीजी मुख्यालय ने कहा कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है हम लोगों को. यह राज्य स्तरीय कार्यक्रम है और समेकित रूप से दिया जाना है। जहां तक नियुक्ति पदाधिकारी का सवाल है, नियुक्ति तो एसपी करते हैं. सब इंस्पेक्टर की डीआईजी करते हैं. नियुक्ति प्राधिकार होना अलग बात है, नियुक्ति वितरण करना अलग। 

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