यहां कब्रों के बीच बने रेस्टोरेंट में बैठकर खाना खाते है लोग, पढ़िए पूरी खबर

यहां कब्रों के बीच बने रेस्टोरेंट में बैठकर खाना खाते है लोग, पढ़िए पूरी खबर

DESK : कई लोग रेस्टोरेंट में खाना खाने को स्टेटस सिंबल समझते हैं. तो कई लोग सिर्फ अपनी भूख मिटाने के लिए रेस्टोरेंट जाते हैं. होटल वाले भी अपने रेस्टोरेंट को आकर्षक तरीके से सजाते हैं ताकि कस्टमर अधिक से अधिक आये. इसी कड़ी में हम आपको एक ऐसे रेस्टोरेंट के बारे में बताने जा रहे हैं जो किसी लग्जरी रेस्टोरेंट्स की तरह नहीं बल्कि कब्रिस्तान में बना है. कब्रिस्तान में बने रेस्टोरेंट में लोग वहां बड़े ही चाव से खाना खाते साथ ही चाय का भी आनंद लेते हैं. गुजरात के अहमदाबाद शहर के बीचोबीच स्थित लकी रेस्टोरेंट बाहर से किसी आम रेस्टोरेंट जैसा ही दिखता है. 

लेकिन जैसे ही कदम अंदर रखते हैं तो टेबल कुर्सियों की बराबर में बनी कब्रिस्तान किसी को भी चौंका देती है.यहां कुल 25  क़ब्रे हैं. जिनकी वजह से लकी रेस्टोरेंट कम और कब्रिस्तान ज्यादा दिखता है. बहुत पहले राहगीर चाय पीने के लिए लगातार उस रेस्टोरेंट में जाया करते थे. चुकी इस होटल ने अपने मालिक की किस्मत को थोड़े वक्त में ही बदल कर रख दिया. इसलिए इसका नाम 'लकी' रखा गया. वर्तमान समय की बात करें तो होटल की रोज की कमाई डेढ़ लाख रुपया से कम नहीं बताई जाती है. अहमदाबाद में लकी रेस्टोरेंट के उस पार सीधी सैयद मस्जिद मानो फदीर सैयद की मस्जिद है. कहा यह भी जाता है कि अहमदाबाद में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस मस्जिद में कुछ वक्त बिताए थे. 

रेस्टोरेंट में सुबह छः बजे से लेकर बारह बजे तक खुले रहने का कारण यह है कि न सिर्फ हम उम्र बल्कि समाज के हर लोग या मजहब से जुड़े लोग बिना किसी भेदभाव के साथ बैठे एक साथ मिलते हैं. इसमें हिंदू और मुसलमानों की अलावा और भी समुदायों से जुड़े लोग होते हैं. टैक्सी ड्राइवर से लेकर छोटे व्यवसायी, विद्यार्थी, नौकरी पेशा, शहर के कई सामाजिक हस्तियाँ से लेकर पत्रकार और बड़े राजनीतिक व्यक्ति भी इनमें शामिल होते हैं. आपको बता दें कि मशहूर चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन को यहां की चाय बेहद पसंद थी. हुसैन साहब अहमदाबाद आते तो लकी की चाय पीना न भूलते थे. हुसैन साहब को यहां की चाय दीवानगी महसूस कराती थी और उन्होंने 15 साल पहले रेस्टोरेंट को खुद की बनाई हुई एक पेंटिंग तोहफे के दौर में दी थी. आज भी यह पेंटिंग लकी रेस्टोरेंट की शान बढ़ा रही है. कई लोग तो यह भी बताते हैं कि इस पेंटिंग की कीमत रेस्टोरेंट से ज्यादा थी. लेकिन लकी के मालिकों ने इसे बेचना कभी मुनासिब नहीं समझा. वही उस होटल में काम कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि सबसे पहले कब्रों को सुबह में साफ कर खुशबू वाली अगरबत्ती जलाई जाती है. साथ ही फुल से भी इसे सजाए जाते हैं.

वंदना शर्मा की रिपोर्ट 

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