कैमूर में जनप्रतिनिधि के खिलाफ आक्रोश, ग्रामीणों ने कहा- वोट नहीं देंगे

कैमूर में जनप्रतिनिधि के खिलाफ आक्रोश, ग्रामीणों ने कहा- वोट नहीं देंगे

Kaimur: जिले में चुनाव नजदीक आते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश देखा जा रहा है. सरकार 15 सालों में विकास का दावा तो करती है लेकिन ग्रामीण दावे का पोल खोल कर स्थानीय नेताओं पर गुस्सा उतार रहे हैं. मोहनिया विधानसभा क्षेत्र का बरैथा गांव जहां कई सालों से सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने वोट बहिष्कार का निर्णय लिया है. ग्रामीणों की मानें तो अब विकास की गंगा बहाने वाले विधायकों को जूता, चप्पल, और झाड़ू की माला से स्वागत करने के लिए ग्रामीणों ने तैयारी कर रखी है.

बरैथा गांव के छोटे लाल प्रजापति बताते हैं कई वर्षों से यहां रास्ता नहीं है. तीन पीढ़ी पहले से रास्ते की मांग हो रही है. दस दिन पहले हमारी बीवी को बच्चा होने वाला था. उसको खाट पर टांग कर कच्चे रास्ते से पक्के रास्ते तक ले जा रहे थे तभी रास्ते में ही उसका बच्चा हो गया. इसलिए हम सभी वोट बहिष्कार कर रहे हैं. रोड नहीं तो वोट नहीं क्योंकि हम लोगों की समस्याओं को कोई सुनने नहीं आता है तो वोट क्यों दे.


स्थानीय ग्रामीण मीरा देवी बताती हैं हम लोगों को मेन सड़क तक जाने के लिए रास्ता नहीं है. जिस कारण वोट बहिष्कार कर रहे हैं. हम लोग उन्हीं को वोट देंगे जो हम लोगों का सड़क बनवाएगा. अगर कोई वोट मांगने आएगा तो उसे जूता, चप्पल, झाड़ू का माला पहनाया जाएगा. छात्र सुजीत पटेल ने कहा कि सड़क नहीं बनने के कारण बारिश के मौसम में 4 महीने पढ़ाई बाधित हो जाती है. जिससे हम लोग का रिजल्ट भी खराब हो जाता है.

ग्रामीण नाथू चौधरी बताते हैं कई सालों से रोड नहीं है. पहले आबादी कम थी लेकिन अब आबादी बढ़ गई है जिससे खासा परेशानी होती है. गांव के एक तरफ नदी पड़ता है तो दूसरी तरफ नहर है और कच्चे मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है.

स्थानीय विधायक निरंजन बताते हैं बरैथा गांव में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लंबी चौड़ी सड़क बनी हुई है. अब ग्रामीण कहते हैं कि गांव से जहां मठ है वहां तक रास्ता नहीं है. मेरी विभाग से बात हुई है. सरकार ने निर्णय लिया है जो गांव के रास्ते में स्कूल, मठ अगर है तो उसका सर्वे शुरू हो गया है उनको भी रास्ते से जोड़ा जाएगा. जिस पर काम शुरू हो गया है. गांव के लोगों द्वारा पहले नहीं बताया गया, चुनाव में कहा गया है, तो समाधान चुनाव में संभव नहीं है. वहां हम जाएंगे, लोगों से बात करेंगे समझाने का प्रयास किया जाएगा.

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