सफेद डायमंड (मखाना) के उत्पादन में मिथिलांचल को भी पीछे छोड़ने में कामयाब हो गया कटिहार, विदेशों तक हो रही है सप्लाई

सफेद डायमंड (मखाना) के उत्पादन में मिथिलांचल को भी पीछे छोड़ने में कामयाब हो गया कटिहार, विदेशों तक हो रही है सप्लाई

KATIHAR : मखाना उत्पादन प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के मामले में अब मिथिलांचल को टक्कर दे रहा है सीमांचल का जिला कटिहार, वैसे तो कटिहार के कई मखाना प्रोसेसिंग एवं पैकेजिंग फैक्ट्री से भारत के कोने-कोने तक इस सफेद डायमंड कहे जाने वाले मखाना के सप्लाई से कटिहार को नई पहचान मिला है लेकिन कटिहार के इस चाचा-भतीजे की जोड़ी ने इस मामले में कमाल कर दिया है, उन्नत किस्म के मखाना को प्रोसेसिंग एवं अच्छे तरीके से पैकेजिंग कर कटिहार के मखाना को भारत के कई प्रमुख राज्य के साथ-साथ विदेश तक पहुंचाया जा रहा है।

 बड़ी बात यह है यह फैक्ट्री अब इस इलाके में रोजगार सृजन का एक बड़ा जरिया भी बन गया है, बड़ी संख्या में महिला मजदूरों को इन फैक्ट्रियों में अलग-अलग तरह के रोजगार मिलने से क्षेत्र के लिए रोजगार के लिए भी एक बड़ा अवसर बना है, इसके अलावा देश के कोने कोने के साथ विदेशों तक मखाना पहुंचने से कटिहार को एक ग्लोबल पहचान मिल रहा है। लेकिन इसके साथ इस उद्योग को लेकर सरकार का सहयोग नहीं के बराबर है।

इस उद्योग से जुड़े राकेश रंजन बताते हैं कि पहले मिथिलांचल में सबसे अधिक मखाना का उत्पादन होता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। आज मिथिलांचल में यहां से सप्लाई की जाती है। स्थानीय स्तर पर 50 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है। लेकिन इस उद्योग को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। राकेश रंजन का कहना है कि इसमें बहुत अधिक संभावनाएं है, लेकिन सरकार की तरफ से इसे आगे बढ़ाने के लिए किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिलता है। न ही कोई प्रचार किया जाता है, न ही किसी प्रकार का लोन दिया जाता है।

चाइना तक होती है सप्लाई

वहीं इस उद्योग से जुड़े राकेश रंजन के चाचा राधेश्याम टिकरीवाल का कहना है कि दस साल पहले तक स्थिति कुछ और थी। लेकिन अब यहां पर कई प्रकार के वैराइटी वाले मखाना का उत्पादन किया जाता है। जो देश के सभी राज्यों के साथ ब्रिटेन, चाइना जैसे देशों में सप्लाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि आज कटिहार और पूर्णिया में सबसे अधिक मखाना का उत्पादन किया जा रहा है।

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