शैक्षणिक और सामाजिक जीवन के आदर्श पुरुष हैं केदारनाथ पाण्डेय : विनय मोहन

शैक्षणिक और सामाजिक जीवन के आदर्श पुरुष हैं केदारनाथ पाण्डेय : विनय मोहन

Desk : बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदारनाथ पांडेय शैक्षणिक और सामाजिक जीवन के आदर्श पुरुष है। यह कहना है ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के संयुक्त सचिव सह सिनेट सदस्य विनय मोहन का। 

विनय मोहन ने कहा है कोविड-19 के दहशत एवं चुनाव आयोग के सख्त निर्देश के बीच महान शिक्षाविद और विगत 50 वर्षों से शिक्षा और शिक्षकों के लिए एक अलग ही सोच रखने वाले केदारनाथ पाण्डेय जी के नामांकन में शरीक होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह उनकी चौथी पारी का शंखनाद का अवसर था जिसमें सब शिक्षक साथी जीत की मंजिल तक पहुंचाने के लिए कृत संकल्पित दिखाई दे रहे थे। वैसे दो ऐसे क्षेत्र हैं जहां अनुभव को ही प्राथमिकता दी जाती है वह शिक्षा और चिकित्सा का क्षेत्र है। 

विनय मोहन ने कहा है कि केदारनाथ पांडेय ने अनुभव और विद्वत्ता के बल पर जो आज बिहार प्रदेश में पहचान बनाई है वह न सिर्फ बिहार माध्यमिक शिक्षक साथियों के लिए अनुकरणीय है बल्कि समाज के हर बुद्धिजीवियों के लिए प्रेरणास्पद है। विधान परिषद् के रूप में विगत् अठारह वर्षों में विधानपरिषद् में इनके द्वारा दिए गए भाषणों का दस्तावेज मौजूद है। संभवतः इनकी सादगी, सहृदयता, सदाशयता और विद्वत्ता ने ही लगभग बाइस जिले के आम शिक्षक और शिक्षक प्रतिनिधि नामांकन को ऐतिहासिक बनाने के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा है कि अस्वस्थता के बावजूद आदरणीय महासचिव का इलेक्ट्रॉनिक मिडिया के माध्यम से इनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के प्रति उदगार सबको झकझोरने के लिए काफी था। वैसे शिक्षक साथियों के लिए एक अलग स्पष्ट संदेश ही था क्योंकि वे विगत दिनों से कुछ अलग ही सोचने लगे थे।

नामांकन में नये शिक्षक साथियों की भारी भीड़ और उत्साह कुछ अलग कहानी कह रही थी। मुझे ऐसा लगा कि पहले दिन की यह झलकी देखकर पूर्ण रूपेण सभी विरोधी जो पूर्णिमा और अमावस्या को ही दिखाई पड़ते हैं। मुरझा गए होंगे। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के सभी शिक्षक यह संकल्प ले चुके हैं कि इस बार की जीत न सिर्फ ऐतिहासिक होगी अपितु आगे के लिए ऐसी लकीरें खींची जाएगी जिसे पाटना वोटों के मामले शाय़द ही संभव हो।

विगत 14 वर्षों में पहली बार पाण्डेय जी का ऐसा आक्रोशपूर्ण भाषण मैंने सूना। इसमें वर्तमान और भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट दिखाई पड़ रही थी। विगत वर्ष में इनके द्वारा किए गए कार्यों का सिंहावलोकन के साथ ही शिक्षकों के अधुरे कार्यों को मुकाम तक पहुंचाने की जीजिविषा स्पष्ट झलक रही थी। ये हमेशा शिवमंगल सिंह सुमन की पंक्तियों से प्रेरणा लेने वाले इंसान हैं-

गति प्रबल पैरों में भरी, फिर क्यों रहें दूर दूर खड़ा। जब आज मेरे सामने, है रास्ता इतना पड़ा। जबतक मंजिल न पा सकूं।जबतक न मुझे विराम है,चलना हमारा काम है।

विनय बिहार ने कहा है कि किसी जनप्रतिनिधि के लिए यह चिंतनीय अवश्य होगा कि कुछ शिक्षक साथियों का भाषाई मर्यादा का उल्लघंन बदस्तूर जारी है। इनको विचलित होना स्वाभाविक भी है क्योंकि यह दिन रात शिक्षा और शिक्षक के चिंता में ही अपने को चिंतित करते रहे। इनके द्वारा संबोधन में कही गईं यह पंक्ति मुझे रात भर नींद में बाधा उपस्थित करती रही कि 22 को बक्सा में हमारा भाग्य बंद होगा या शिक्षक का। यह सब सोचना आप सभी सारण के बुद्धिजीवी मतदाता बंधुओं का काम है। आप अपने कर्म से इसे मुकाम तक पहुंचायें। कहा भी गया है कि कर्म भूमि की दुनिया में, श्रम सभी करना पड़ता है। ईश्वर तो सिर्फ लकीर देता है,रंग हमें ही भरना पड़ता है।

विनय बिहारी ने कहा है कि आप अपने वोट की चोट से पाण्डेय जी की पीड़ा, इस दर्द को समाप्त करे कि सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाए।यह एक ऐसे शिक्षक का उदगार है जो 14 वर्षों से साये की तरह देखा भी है परखा भी है और अजमाया भी है।

जय शिक्षक। जय शिक्षक संघ।

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