केंद्रीय विवि झारखंड में नियम विरुद्ध नियुक्ति मामला, आरएसएस प्रचारक के करीबी भी शामिल

केंद्रीय विवि झारखंड में नियम विरुद्ध नियुक्ति मामला, आरएसएस प्रचारक के करीबी भी शामिल

Desk: केंद्रीय विवि झारखंड में नियम विरुद्ध कार्य स्थापना काल से ही हो रहे हैं. पूर्व कुलपति डॉ डीटी खटिंग के साथ-साथ डॉ नंद कुमार यादव के कार्यकाल तक यही स्थिति बनी रही. डॉ खटिंग के कार्यकाल की सीबीआइ जांच चल रही है. उस समय का मामला भी कोर्ट में चल रहा है. संजय कुमार शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया है कि सीयूजे में नियम विरुद्ध नियुक्ति में कुलपति व अधिकारियों के रिश्तेदार व करीबी के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के भी सदस्य शामिल रहे हैं.

आरएसएस के प्रचारक गोपाल शर्मा का इसमें नाम सामने आ रहा है. उनके करीबी मुकेश विश्वकर्मा और विजय विश्वकर्मा इस नियुक्ति में शामिल रहे. वहीं शर्मा का कहना है कि वे लंबे समय से प्रचारक रहे हैं. परिवार से उनका कोई संबंध नहीं है. जहां तक करीबी की नियुक्ति की बात सामने आ रही है, तो यह साजिश के तहत बदनाम करने की कोशिश है. गड़बड़ी हुई है, तो सरकार किसी सक्षम एजेंसी से जांच करा ले. 

दूसरी तरफ झारखंड हाइकोर्ट में दायर जनहित याचिका में बताया गया है कि विवि में यूजीसी की रोक के बावजूद रजिस्ट्रार सहित 13 पदों पर 22 लोगों की नियुक्ति कर ली गयी. सीयूजे ने पहले कुछ पदों के लिए नियुक्ति नियमावली बनायी थी, लेकिन वर्ष 2015 में इसकी जांच की गयी, तो पाया गया कि विवि ने कई पदों के लिए नियमावली ही नहीं बनायी है.

जिन पदों के लिए नियमावली बनी है, वह भी केंद्र सरकार और यूजीसी के मानकों के विरुद्ध है. यूजीसी ने 24 फरवरी 2015 को आदेश दिया था कि जब तक नियुक्ति नियमावली नहीं बनती है, तब तक नॉन टीचिंग पदों पर नियुक्ति नहीं होगी, पर विवि में इसकी अवहेलना करते हुए 24 मई 2017 को नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिया. इसके तहत रजिस्ट्रार पद पर एसएल हरि कुमार को सात मई 2018 को नियुक्त किया गया. वहीं वित्त अधिकारी संतोष कुमार व परीक्षा नियंत्रक प्रभुदेव को नियुक्त किया गया. लाइब्रेरियन, इनफॉरमेशन साइंटिस्ट, फार्मासिस्ट, जूनियर इंजीनियर, लाइब्रेरी असिस्टेंट, अटेंडेंट आदि की भी नियुक्ति की गयी.

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