बदल रही किस्मत! कभी मिनी चंबल के रूप में थी पहचान, अब अपनी खेती से किसान बदल रहे हैं लोगों की मानसिकता

बदल रही किस्मत! कभी मिनी चंबल के रूप में थी पहचान, अब अपनी खेती से किसान बदल रहे हैं लोगों की मानसिकता

बेतिया। कभी मीनी चंबल के नाम से विख्यात था प. चंपारण। जहां सूर्य डूबते ही ग्रामीण अपने अपने घरो से नहीं निकलते थे अब वहीं के किसान बिहार व केंद्र सरकार द्वारा बताये गएआधुनिक तरीके से खेती कर मालामाल हो रहे हैं। जहा पहले  खरपतवार होता था, अब वहां सब्जी और मक्के की खेती साथ ही केला का पौधा भी लगा रहे हैं। खेती की नई विधि से कम लागत में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं यहां के किसान।

स्प्रिंकलर सिस्टम से मिला लाभ, सिंचाई पर एक हजार की जगह अप सिर्फ 50 रुपए खर्च

इस संबंध मे भीतहा प्रखण्ड के विनही गाव के किसान निरंजन कुशवाहा व रवीन्द्र कुशवाहा ने बताया की पहले इस जमीन पर कुछ भी नहीं होता था जब से हमलोग यहा स्प्रिंकल लगाए है तब से यहा अच्छी फसल हो रही है और लागत भी कम लगता है और पाओढ़े को जितना पानी की जरूरत होती है उतना पानी हम देते हैं। आज हमलोग काफी संतुष्ट है। सभी किसानो के चेहरे पर खुशहाली है। किसान रवीन्द्र कुशवाहा ने बताया की 2005 के बाद से हमारा क्षेत्र में भी मानों विकास का धारा बह चली। उन्होने कहा की पहले हमलोग एक एकड़ खेत की सिचाई करने मे जहा पहले एक हजार रुपया लगता था अब वही मात्र 40 से 50 रुपया मे कर लेते हैं।

वही इस संबंध मे जिला उद्यान पदाधिकारी विवेक भारती ने बताया की किसानों की आय को दुगुना करने का सबसे आसान तरीका है। उसकी लागत को कम किया जाय आज किसान भारत सरकार का महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री कृषी सिचाई योजना से ड्रीप व स्प्रिंकल का प्रयोग कर यहा के किसान अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही उन्होने यह भी बताया की ड्रीप व स्प्रिंकल सिचाई योजना बिहार सरकार का भी जल जीवन हरीयाली योजना का महत्वपूर्ण अंग है। इस विधी से किसान समय पर अपना फसल लगाते है और इसका उत्पादन करते है जिससे इनका लागत मूल्य से अधिक मूल्य पर इनका फसल आसानी से बिक जाता है। वहीं बिहार सरकार द्वारा आज हर खेत तक बिजली भी पहुंचा दी गई है जिससे यह कम लागत मे अपने खेतों की सिचाई कर ले रहे है।

ताइवानी केले की भी हो रही खेती

 इस संबंध मे प. चंपारण के यूपीए विकास आयुक्त रवीन्द्रनाथ प्रसाद सिंह ने बताया की यहा के किसान ताइवान वेराईटी का केला का पौधा लगाया है जो की काफी उन्नत किस्म का पौधा है। जिसमे लागत भी कम लगता है और पैदावार भी अच्छा होता। साथ ही उन्होने यह भी बताया की जिला पदाधिकारी व हमारी सोच है की जबतक हमारे किसान खुश नही रहेंगे तबतक हमारा जिला, राज्य व देश आगे नही बढ़ सकेगा। पहले यहां कुछ भी नही होता था इस बलुई भूमी में पर आज यहां बिहार व केंद्र सरकार की योजना से यहा के किसान भी आधुनिक तरीके से खेती कर अच्छी पैदावार कर रहे है। उन्होने कहा की कृषी के क्षेत्र मे रोजगार के भी अपार संभावना है और यही एक ऐसा फील्ड है जो काफी लोगो को रोजगार दे सकता है। आज यहां के किसान मगही फूलगोभी व मक्का का खेती किए हैं जो कि होली के समय जब यह निकलेगा तो काफी महंगा दाम मे बिकेगा। जिससे इनका आमदनी लागत से निश्चित रूप से दुगुनी मिलेगी। किसानो को आल्टरनेटिव क्रौप्स भी लगाने की सलाह दी गई|

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