तेजस्वी से भाव नहीं मिलने के बाद लालू की दया पर टिके कुशवाहा, 49 सीटों के लिए पहलवानों की सौंपी लिस्ट

तेजस्वी से भाव नहीं मिलने के बाद लालू की दया पर टिके कुशवाहा, 49 सीटों के लिए पहलवानों की सौंपी लिस्ट

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. सियासी अखाड़े के सजते ही पार्टियों ने अपने पहलवानों को चुनावी मैदान में उतारने को लेकर तैयारी शुरू कर दी है. इन सब के बीच महागठबंधन में अबतक सीट बंटवारे को लेकर कुछ भी साफ नहीं हैं. मांझी के जाने के बाद अब राजद और कांग्रेस के सहयोगी दल लगातार ज्यादा सीटों की डिमांड कर रहे हैं.

RLSP ने ठोगी 49 सीटों पर दावेदारी
रालोसपा चीफ उपेन्द्र कुशवाहा ने इस बार विधानसभा में अपने 49 पहलवानों को उतारने की चाहत दिखाई है. रालोसपा नेताओं ने शुक्रवार को राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह से दूसरी बार मुलाकात की है. अंदरखाने से खबर है कि इस मुलाकात में रालोसपा ने 49 सीटों की लिस्ट प्रत्याशियों के नाम के साथ राजद को सौंप दिया है. बताया जाता है कि सीटों के बंटवारे को लेकर कुशवाहा ने तेजस्वी को साइड करते हुए राजद चीफ लालू यादव से रिम्स में मुलाकात की थी और वहां भी 49 सीटों की डिमांड की थी. लेकिन महागठबंधन में उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा को तेजस्वी 49 सीट देते हैं ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.


मुकेश सहनी भी कर रहे हैं 25 सीटों पर दावेदारी
उधर वीआईपी चीफ मुकेश सहनी भी इस बार दिल मांगे मोर के तर्ज पर डिमांड कर रहे हैं. सहनी ने इस बार विधानसभा में 25 सीटों की डिमांड की है. सहनी ने बकायदा इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी है. लेकिन इनसब के बीच सवाल यह है कि क्या राजद रालोसपा और वीआईपी की इन सीटों की डिमांड मानेगा? 


तेजस्वी यादव नहीं दे रहे हैं वेट
विधानसभा चुनाव को लेकर अब दिन कम बचे हैं. ऐसे में तेजस्वी का रुख यह साफ बताता है कि सहयोगी पार्टियों को भाव देने के मूड में नहीं हैं तेजस्वी सरकार पर हमलावर हैं और बाढ़ का मुद्दा हो या रोजगार का तेजस्वी यादव अकेल ही सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं. तेजस्वी यादव को कई महीनों से सहयोगी दलों के नेताओं के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाते नहीं देखा गया है. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि तेजस्वी यह मैसेज क्लीयर कर देना चाहते हैं कि महागठबंधन की अगुवाई राजद ही करेगा और तेजस्वी के ही नेतृत्व में चुनाव लड़ना होगा. यही नहीं तेजस्वी यह भी बताना चाहते हैं कि सीटों को लेकर वो किसी तरह के प्रेशर पॉलीटिक्स को मानने वाले भी नहीं हैं. अब देखना है कि कुशवाहा और सहनी की ये डिमांड किस हद तक पूरी होती है.

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