बिहार सरकार को किन मजबूरियों में राज्य में लगाना पड़ा लॉक डाउन, पढ़िए पूरी खबर

बिहार सरकार को किन मजबूरियों में राज्य में लगाना पड़ा लॉक डाउन, पढ़िए पूरी खबर

PATNA : देश में कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. कोविड-19 को लेकर बिहार में अंततः 10 दिनों का सम्पूर्ण लॉकडाउन लागू कर दिया गया है. हालाँकि राज्य में लॉकडाउन लगाने की मांग लगातार उठ रही थी. लेकिन सरकार ने लॉक डाउन के बजाय कई गाइडलाइन जारी कर दिया. सवाल यह है कि बिहार सरकार की क्या मज़बूरी रही होगी की राज्य में लॉकडाउन लगाना पड़ा. इसके बाद संक्रमण के बड़ते संख्या, अस्पतालों में बेड की कमी और दवाइयों की कालाबजारी के कारण मरीजो के सही तरह से इलाज नही किये जाने को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की. 

हाई कोर्ट ने सरकार से जबाव माँगा और तत्काल स्थिति को सुधारने को कहा. यही नहीं हाईकोर्ट ने जब मौजूदा सरकार से ये भी कहा की अगर आप 4 मई तक राज्य में लॉकडाउन नहीं लगाते हैं तो मजबूरन हाईकोट निर्णय लेगा. आनन फानन में नीतीश कुमार ने क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप के मीटिंग के बाद लॉकडाउन का फैसला सुनाया. सवाल यह भी है की आखिर बिहार में सरकार क्यों नहीं निर्णय ले सकी. कोर्ट को क्यों हस्तक्षेप करना पड़ा. किन कारणों से वर्तमान की सरकार लॉक डाउन से बचना चाह रही थी. बिहार में कोरोना लगातार अपनी चपेट में ले रहा है. सरकारी आकड़े के मुताबिक संक्रमित मरीज भी बढ़ते जा रहे है तो वही भारी संख्या में मौत भी हो रही है. आखिर सरकार के फैसले में इतनी देरी क्यों हुई. 

लॉकडाउन से पहले प्रदेश में सरकार ने नाईट कर्फ्यू लगाया था. लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हुआ. हाईकोर्ट लगातार इसकी निगरानी करता रहा और सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया. सरकार के सिस्टम को फ्लॉप बताया. विपक्ष से साथ साथ सहयोगी दल ने भी नीतीश सरकार पर बयानबाजी शुरू कर दी. दबाव में आने के बाद नीतीश कुमार पटना के सड़कों पर भ्रमण करने निकले और मौजूदा हालात को जाना. राजधानी में चारो तरफ भीड़ भाड ही देखने को मिला. कहीं से भी कोई नियम का पालन करते नहीं दिखा. प्रशासन ने भी पूरी कोशिश की. लोगों से नियम को पालन करने को कहा. लेकिन अंततः लॉकडाउन ही एक मात्र विकल्प रहा. 

पटना से वंदना शर्मा की रिपोर्ट 

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