किसान आंदोलन पर बोला सुप्रीम कोर्ट – आपको विरोध का अधिकार, लेकिन शहर को ब्लॉक नहीं कर सकते

किसान आंदोलन पर बोला सुप्रीम कोर्ट – आपको विरोध का अधिकार, लेकिन शहर को ब्लॉक नहीं कर सकते

नई दिल्ली। तीन सप्ताह से नई दिल्ली की सीमाओं पर जमा किसानों के आंदोलन को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। सप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपको कानून के विरोध करने का अधिकार है, लेकिन किसी शहर को ब्लॉक नहीं कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश उसी तरह का है. जैसा कि कुछ माह पहले शाहिनबाग विरोध को लेकर दिया गया था।

गुरुवार को हुए सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोवडे ने कहा  दिल्ली को जाम करने से लोगों को भूखा रहना पड़ सकता है। आपका मकसद बातचीत से पूरा हो सकता है, सिर्फ धरने पर बैठने से काम नहीं चलेगा। विरोध प्रदर्शन तब तक संवैधानिक है, जब तक कि इससे संपत्ति को नुकसान नहीं हो या किसी की जान को खतरा नहीं हो। किसान हिंसा को बढ़ावा नहीं दे सकते।


मदद की कही बात

सीजेआई ने कहा कृषि कानूनों को लेकर उपजे मतभेदों को लेकर किसान और सरकार बैठकर बात कर सकती है। जरुरत पड़ने पर हम भी इसमें सहायता कर सकते हैं। हम निष्पक्ष और स्वतंत्र कमेटी बनाने पर विचार कर रहे हैं, जिसके सामने दोनों पक्ष अपनी बात रख सकें। कोर्ट ने कमेटी में कमेटी में पी साईनाथ, भारतीय किसान यूनियन और दूसरे संगठनों को बतौर सदस्य शामिल करने का भी सुझाव दिया है। इसके बाद कमेटी जो रिपोर्ट दे, उसे मानना चाहिए।

अटार्नी जनरल का तर्क

सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल ने कोरोना को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी मास्क नहीं पहनते, वे भीड़ में बैठते हैं। प्रदर्शनकारी गांवों में जाकर संक्रमण फैलाएंगे। किसान दूसरे के अधिकारों का हनन नहीं कर सकते। इस पर सीजेआई ने कहा किसानों के प्रदर्शन के अधिकार को समझते हैं और इसे दबाने का सवाल ही नहीं उठता। हम सिर्फ इस बात पर विचार कर सकते हैं कि आंदोलन की वजह से किसी की जान नहीं जाए। किसानों को सिर्फ विरोध का तरीका बदलना है।

कृषि कानूनों पर नहीं हुई सुनवाई

किसानों को सड़कों से हटाने की अर्जी पर सुनवाई के दौरान नए कृषि बिल पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा इसके लिए इंतजार किया जा सकता है। 

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