किसान आंदोलन में खुदकुशी करने वाले किसानों की विधवा समेत सैकड़ों महिला हुईं शामिल, कह दी ये बड़ी बात....

किसान आंदोलन में खुदकुशी करने वाले किसानों की विधवा समेत सैकड़ों महिला हुईं शामिल, कह दी ये बड़ी बात....

डेस्क... क़र्ज़ से तंग आकर कथित तौर पर ख़ुदकुशी करने वाले किसानों की विधवाओं समेत सैंकड़ों महिलाएं अब मोदी सरकार के नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शनों में शामिल हो गईं हैं। बुधवार को इन महिलाओं का कहना है कि इस नए क़ानून की वजह से उनकी आजीविका पर ख़तरा मंडराने लगा है। सितंबर में लागू किए गए क़ानूनों को लेकर किसान लगभग एक महीने से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

नई दिल्ली की सीमा पर स्थित एक प्रदर्शन स्थल पर पंजाब से आईं कई विधवा महिलाओं ने कहा कि अगर ये काले क़ानून आते हैं तो और किसान कर्ज़ के बोझ में दबते जाएंगे और भी माएं और बहनें हमारी तरह विधवा हो जाएंगी। परेशान किसानों की ख़ुदकुशी भारत में सालों से एक गंभीर मसला रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक़, 2018 में क़रीब 10,350 किसानों और खेतिहर मज़दूरों ने ख़ुदकुशी की, जो भारत में हुई सभी आत्महत्याओं का क़रीब 8% था। 

 किसान आंदोलन के समर्थन में आईं एक महिला ने कहा कि उनके पति ने तीन साल पहले ख़ुदकुशी कर ली थी। अपने पति की पासपोर्ट साइज़ फोटो लिए वो कहती हैं कि उनके पति पर 5 लाख रुपए का क़र्ज़ हो गया था। वहीं प्रदर्शन में शामिल होने आए पंजाब के एक किसान ने कहा कि बुधवार देर शाम एक 65 वर्षीय सिख संत ने एक प्रदर्शन स्थल पर ख़ुदकुशी कर ली। अब मोदी सरकार कितने और जुल्म करेगी। किसान ने कहा कि संत बाबा राम सिंह ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि वो प्रदर्शनकारी किसानों की हालत देखकर आहत हैं। उनके मौत के बाद कुछ राजनीतिक दलों के नेता ने उन्हें श्रद्धांजलि भी दी है।

सिंह की आत्महत्या के लिए सरकारी उदासीनता को ज़िम्मेदार ठहराते हुए विपक्षी नेता राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को तुरंत क़ानून रद्द करने चाहिए। विपक्षी दलों का मानना है कि छोटे किसानों को डर है कि इससे उनकी फ़सलों के लिए मिलने वाली न्यूनतम क़ीमतों की गारंटी ख़त्म हो जाएगी और उन्हें बड़े खुदरा विक्रेताओं की दया का मोहताज़ होना पड़ेगा। 




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